Delhi High Court: दिल्ली जिमखाना खाली कराने पर HC सख्त, केंद्र सरकार को देना होगा जवाब

दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद में अचानक तेज हुई कानूनी हलचल ने सभी को चौंका दिया है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से सख्त सवाल पूछते हुए जवाब मांगा है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि अदालत को कड़ा रुख अपनाना पड़ा? जानिए इस पूरे मामले के पीछे की बड़ी वजह और आने वाले फैसले का असर।

दिल्ली जिमखाना खाली कराने पर HC सख्त

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 26, 2026

Delhi High Court: दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली कराने के केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई की। क्लब ने सरकार के उस नोटिस को चुनौती दी है, जिसमें उसे 5 जून 2026 तक परिसर खाली करने के लिए कहा गया था। सरकारी आदेश के विरोध में क्लब ने अदालत का रुख किया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर दिया है और आठ सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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कोर्ट में हुई अहम बहस

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से तीखी दलीलें पेश की गईं। क्लब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में कई महत्वपूर्ण कानूनी और प्रक्रियात्मक मुद्दे शामिल हैं, जिन पर विस्तृत विचार आवश्यक है।

उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार का आदेश क्लब के संचालन और उसके सदस्यों के अधिकारों को प्रभावित करता है। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि यह विवाद केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि कानूनी स्तर पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

केंद्र सरकार का पक्ष और प्रस्ताव

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी प्रकार की मनमानी कार्रवाई नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि यदि क्लब निर्धारित तारीख तक स्वयं परिसर खाली नहीं करता है, तब भी जब तक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक बलपूर्वक कब्जा नहीं लिया जाएगा।

सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा कि यदि आवश्यकता हुई तो क्लब को बदले में दूसरी जमीन उपलब्ध कराई जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि नियमों के अनुसार मुआवजे का प्रावधान मौजूद है, जो नकद या वैकल्पिक भूमि के रूप में दिया जा सकता है।

अदालत की टिप्पणी और प्रश्न

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि क्या उनके बयान को आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड में लिया जा सकता है। इसके अलावा अदालत ने याचिकाकर्ता से भी सवाल किया कि आखिर उनकी मुख्य आपत्ति क्या है, खासकर तब जब क्लब के सदस्यों के अधिकारों पर सीधा विवाद नहीं दिख रहा है।

क्लब की आपत्ति और एनसीएलटी का संदर्भ

क्लब की ओर से यह तर्क दिया गया कि सरकार का आदेश अचानक और एकतरफा है, जबकि यह मामला पहले से ही एनसीएलटी (राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण) के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में समानांतर रूप से कार्रवाई करना उचित नहीं है।

अधिवक्ता सिंघवी ने यह भी कहा कि क्लब एक गैर-लाभकारी संस्था है, जिसका उद्देश्य सामाजिक और सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। ऐसे में इसके संचालन पर किसी भी प्रकार का अचानक हस्तक्षेप उचित प्रक्रिया के बिना नहीं किया जा सकता।

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