Delhi Excise Case : केजरीवाल की राहत के खिलाफ CBI की अर्जी, सोमवार तक मांगा जवाब

दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को ट्रायल कोर्ट से मिली डिस्चार्ज की राहत को CBI ने हाई कोर्ट में चुनौती दी है। अदालत ने अब ट्रायल कोर्ट के सभी रिकॉर्ड मंगवाए हैं और अगली सुनवाई 4 मई (सोमवार) को तय की है। क्या केजरीवाल की राहत बरकरार रहेगी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 29, 2026

Delhi Excise Case :  दिल्ली की विवादित आबकारी नीति से जुड़े कानूनी मामले में अब सबकी निगाहें सोमवार पर टिकी हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य आरोपियों को निचली अदालत से मिली राहत के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की याचिका पर सोमवार से नियमित सुनवाई शुरू होगी। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पक्षों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सोमवार तक अपने-अपने विस्तृत जवाब और हलफनामे अदालत में पेश कर दें। यह सुनवाई दिल्ली की राजनीति और कानूनी गलियारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

रिकॉर्ड तलब और CBI से जवाब: कोर्ट ने मांगी पिछली कार्यवाहियों की जानकारी

सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने इस मामले से जुड़े ट्रायल कोर्ट के सभी पुराने आदेशों और संपूर्ण रिकॉर्ड को अपने पास तलब किया है। इसके साथ ही, कोर्ट ने CBI से उस अर्जी पर भी स्पष्टीकरण और जवाब मांगा है, जिसमें पहले से लागू ‘स्टे’ (रोक) को हटाने की मांग की गई है। हालांकि, कार्यवाही के दौरान अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा लिखी गई उस विवादास्पद चिट्ठी पर अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की, जिसमें उन्होंने अदालती प्रक्रिया के बहिष्कार की बात कही थी। कोर्ट का पूरा ध्यान फिलहाल कानूनी दस्तावेजों और प्रक्रियात्मक निष्पक्षता पर केंद्रित है।

शराब नीति का विवाद: भ्रष्टाचार और गोवा चुनाव से जुड़ाव के आरोप

यह पूरा विवाद साल 2021-22 के दौरान दिल्ली सरकार द्वारा लागू की गई नई शराब नीति से शुरू हुआ था। CBI का मुख्य आरोप है कि इस नीति को इस तरह से तैयार और लागू किया गया था कि इससे चुनिंदा शराब माफियाओं और कारोबारियों को गलत तरीके से भारी वित्तीय लाभ पहुँचाया जा सके। जांच एजेंसी का दावा है कि इस लाभ के बदले में सरकारी स्तर पर जो ‘किकबैक’ या रिश्वत प्राप्त हुई, उस काली कमाई का बड़ा हिस्सा आम आदमी पार्टी (AAP) द्वारा गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार और अन्य गतिविधियों में खपाया गया।

मुख्य सूत्रधार बनाम राजनीतिक प्रतिशोध: आरोपों और बचाव की रस्साकशी

जहाँ एक ओर CBI अपनी चार्जशीट और सबूतों के आधार पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस कथित घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड या ‘साजिश का सूत्रधार’ बता रही है, वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी इन दावों को पूरी तरह खारिज करती आ रही है। केजरीवाल और उनके सहयोगियों का तर्क है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बना रही है। वे इसे विपक्षी आवाजों को दबाने की एक सोची-समझी साजिश और ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार देते हैं। वर्तमान में, मामला कानूनी पेचीदगियों में फंसा हुआ है, जहाँ एक पक्ष बेगुनाही का दावा कर रहा है तो दूसरा सख्त सजा की मांग।

भविष्य की दिशा: सोमवार की सुनवाई तय करेगी कानूनी समीकरण

सोमवार को होने वाली सुनवाई केवल तकनीकी दलीलों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए सबूतों में कितना दम है। हाई कोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड की जांच करने से इस मामले में अब तक हुई गलतियों या सही कदमों की समीक्षा हो सकेगी। दिल्ली के करोड़ों नागरिकों और राजनीतिक जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि क्या सोमवार को केजरीवाल और सिसोदिया को कोई राहत मिलती है या फिर CBI के दावों के चलते उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी। फिलहाल, अगली सुनवाई तक राजधानी में सियासी गहमागहमी अपने चरम पर है।

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