Deepinder Goyal Resignation: दीपिंदर गोयल का इटर्नल CEO पद से इस्तीफा, क्या नए मिशन पर हैं जोमैटो फाउंडर?

क्या जोमैटो और ब्लिंकिट के भविष्य में कुछ बड़ा होने वाला है? संस्थापक दीपिंदर गोयल ने अचानक इटर्नल के ग्रुप सीईओ पद से हटने का फैसला कर कॉर्पोरेट जगत को हिला दिया है। 1 फरवरी से अल्बिंदर ढींडसा कंपनी की कमान लेंगे। आखिर वो कौन से 'नए आइडिया' हैं जिनके लिए गोयल ने पद छोड़ा?

Deepinder Goyal Resignation

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 21, 2026

Deepinder Goyal Resignation: भारतीय फूड टेक और क्विक कॉमर्स सेक्टर की दिग्गज कंपनी ‘एटरनल’ (Eternal), जो जोमैटो (Zomato) और ब्लिंकिट (Blinkit) की पैरेंट कंपनी है, से एक बड़ी खबर सामने आई है। कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) दीपेंद्र गोयल ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। गोयल का यह फैसला कॉर्पोरेट जगत के लिए काफी चौंकाने वाला है, क्योंकि उन्होंने जोमैटो को एक छोटे से स्टार्टअप से उठाकर शेयर बाजार की बुलंदियों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शेयरधारकों को लिखे एक भावुक पत्र में उन्होंने अपने इस निर्णय की पुष्टि की और कंपनी के भविष्य के रोडमैप पर चर्चा की।

अलबिंदर ढिंढसा होंगे नए उत्तराधिकारी: नेतृत्व परिवर्तन का मुख्य कारण

दीपेंद्र गोयल के इस्तीफे के साथ ही कंपनी ने नए नेतृत्व की घोषणा भी कर दी है। ब्लिंकिट के संस्थापक अलबिंदर ढिंढसा अब एटरनल के नए सीईओ के रूप में कमान संभालेंगे। गोयल ने अपने पत्र में विश्वास जताया कि ढिंढसा के पास वह दूरदृष्टि और अनुभव है जो जोमैटो और ब्लिंकिट दोनों ब्रांड्स को अगले विकास चरण (Next Growth Phase) में ले जाने के लिए आवश्यक है। गोयल के अनुसार, कंपनी के बेहतर भविष्य और नई रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नेतृत्व में यह बदलाव समय की मांग थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ढिंढसा के नेतृत्व में कंपनी अधिक संगठित होकर काम कर सकेगी।

जीएसटी विवाद और जुर्माने के बीच आया बड़ा फैसला

दिलचस्प बात यह है कि यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब एटरनल समूह कानूनी और वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। हाल ही में कंपनी को जीएसटी (GST) विभाग की ओर से बड़ा झटका लगा है। एटरनल को ब्याज और जुर्माने सहित कुल 27.56 करोड़ रुपये की भरपाई करने का निर्देश दिया गया है। हालांकि, कंपनी की ओर से आधिकारिक तौर पर इस्तीफे और इस जुर्माने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन से कंपनी इन वित्तीय पेचीदगियों को नए नजरिए से देख सकती है।

फूडीबे से जोमैटो तक का सफर और गोयल की नई भूमिका

दीपेंद्र गोयल की उद्यमिता की कहानी साल 2008 में शुरू हुई थी, जब उन्होंने पंकज चड्ढा के साथ मिलकर ‘फूडीबे’ (Foodiebay) की नींव रखी थी। बाद में इसे रीब्रांड करके ‘जोमैटो’ नाम दिया गया, जो आज घर-घर में पहचाना जाने वाला नाम है। हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान गोयल ने यह संकेत दिया था कि वह पारंपरिक सीईओ की भूमिका की तुलना में ‘चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर’ (CPO) की भूमिका में अधिक सहज महसूस करते हैं। उनका मानना है कि वे इनोवेशन और प्रोडक्ट डेवलपमेंट पर काम करके कंपनी को अधिक योगदान दे सकते हैं। पद छोड़ने के बाद अब उन्हें नए और क्रांतिकारी आइडियाज पर काम करने का पर्याप्त अवसर मिलेगा।

एटरनल के भविष्य की रणनीति और बाजार की प्रतिक्रिया

नेतृत्व में इस बदलाव के बाद अब बाजार की नजरें अलबिंदर ढिंढसा की रणनीति पर टिकी हैं। ब्लिंकिट के माध्यम से क्विक कॉमर्स में अपनी धाक जमाने वाले ढिंढसा के सामने अब जोमैटो के फूड डिलीवरी बिजनेस और ब्लिंकिट की सप्लाई चेन को एकीकृत करने की चुनौती होगी। दीपेंद्र गोयल भले ही सीईओ का पद छोड़ रहे हैं, लेकिन कंपनी की मूल संरचना और इसके विजन को गढ़ने में उनकी भूमिका मार्गदर्शक के तौर पर बनी रहेगी। कंपनी को उम्मीद है कि इस परिवर्तन से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और परिचालन में अधिक पारदर्शिता आएगी।

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