West Bengal News : 22 जिलों में चला स्वच्छता संकल्प अभियान, CM सुवेंदु अधिकारी बोले- कचरा-मुक्त बंगाल हमारा संकल्प

पश्चिम बंगाल में स्वच्छता को लेकर 22 जिलों में ‘स्वच्छता संकल्प अभियान’ चलाया गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कचरा-मुक्त बंगाल का संकल्प दोहराते हुए लोगों से स्वच्छता अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। अब सवाल है कि इस अभियान के जरिए राज्य में सफाई व्यवस्था को कितना प्रभावी और स्थायी बनाया जा सकेगा?

West Bengal News

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 6, 2026

West Bengal News  : पश्चिम बंगाल में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने और डेंगू के बढ़ते खतरे को नियंत्रित करने के उद्देश्य से चलाया गया तीन दिवसीय ‘स्वच्छता संकल्प अभियान’ पूरा हो गया है। राज्य सरकार की ओर से बड़े स्तर पर चलाए गए इस अभियान में सफाई के साथ-साथ मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के जरिए अभियान की विस्तृत जानकारी साझा की और इसे स्वच्छ तथा स्वस्थ पश्चिम बंगाल की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

22 जिलों की 128 नगरपालिकाएं अभियान में शामिल

मुख्यमंत्री के अनुसार, शहरी विकास एवं नगरपालिका मामलों के विभाग की देखरेख में आयोजित इस अभियान को राज्य के 22 जिलों तक पहुंचाया गया। अभियान में 128 नगरपालिकाओं के 1,600 से अधिक वार्डों को शामिल किया गया। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर जमा गंदगी हटाने के साथ-साथ उन जगहों की पहचान करना था, जहां मच्छरों के पनपने की संभावना रहती है। प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर सफाई और मच्छर नियंत्रण गतिविधियों को प्राथमिकता दी।

छह हजार से अधिक अवरुद्ध नालियां साफ

अभियान के दौरान राज्यभर में बड़ी संख्या में नालियों और कचरा जमा होने वाले स्थानों की सफाई की गई। आंकड़ों के मुताबिक, 6,065 अवरुद्ध नालियों को साफ किया गया। इसके अलावा 1,608 स्थानों पर बिखरे कचरे को हटाया गया। सड़कों के किनारे लंबे समय से जमा कचरे वाले 4,511 स्थानों पर भी सफाई अभियान चलाया गया। इन प्रयासों का मकसद जलभराव और गंदगी से पैदा होने वाली समस्याओं को कम करना रहा।

27 हजार से ज्यादा मच्छर प्रजनन स्थल खत्म

डेंगू की रोकथाम अभियान का प्रमुख हिस्सा रहा। प्रशासन ने मच्छरों के प्रजनन के संभावित ठिकानों की पहचान कर वहां विशेष सफाई और नियंत्रण कार्रवाई की। अभियान के दौरान कुल 27,378 स्थानों पर मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म किया गया। अधिकारियों ने ऐसे स्थानों पर जमा पानी और अन्य संभावित स्रोतों को हटाने पर ध्यान दिया, ताकि डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके।

बाजारों और सार्वजनिक संस्थानों में भी सफाई

सरकार ने अभियान को केवल सड़कों और नालियों तक सीमित नहीं रखा। लोगों की रोजमर्रा की गतिविधियों से जुड़े प्रमुख सार्वजनिक स्थानों को भी इसमें शामिल किया गया। अभियान के तहत 1,106 बाजार और हाट, 1,304 स्कूल एवं कॉलेज परिसर, 544 सरकारी कार्यालय और 315 अस्पताल परिसरों में स्वच्छता गतिविधियां संचालित की गईं। इन स्थानों पर साफ-सफाई के साथ मच्छर नियंत्रण के उपायों पर भी जोर दिया गया।

जागरूकता के लिए 35 हजार से अधिक सामग्री वितरित

स्वच्छता और डेंगू से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए 35,000 से अधिक IEC यानी सूचना, शिक्षा और संचार सामग्री वितरित की गई। सरकार का उद्देश्य लोगों को स्वच्छता के महत्व और मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के उपायों की जानकारी देना रहा। अभियान में 118 गैर-सरकारी संगठनों और सिविल सोसाइटी संस्थाओं ने भी भागीदारी की, जिससे अभियान को जमीनी स्तर पर व्यापक सहयोग मिला।

स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि स्वच्छता का मतलब केवल किसी अभियान के दौरान एक बार सफाई करना नहीं होना चाहिए। इसके लिए लोगों को अपने घरों, मोहल्लों, सड़कों और आसपास के सार्वजनिक स्थानों को लगातार साफ रखने की आदत विकसित करनी होगी। उन्होंने नागरिकों से सफाई व्यवस्था में सहयोग करने और अपने आसपास गंदगी जमा नहीं होने देने की अपील की।

‘कचरा-मुक्त बंगाल’ का संकल्प दोहराया

मुख्यमंत्री ने ‘कचरा-मुक्त पश्चिम बंगाल’ और ‘डेंगू के खिलाफ एकजुट पश्चिम बंगाल’ के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता को प्रभावी बनाने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ आम लोगों की सक्रिय भागीदारी भी जरूरी है। अभियान के जरिए सरकार ने साफ संकेत दिया कि स्वच्छता और डेंगू नियंत्रण को केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामूहिक दायित्व के रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

रोजमर्रा की आदत बनाने पर सरकार का फोकस

‘स्वच्छता संकल्प अभियान’ पूरा होने के बाद अब सरकार का जोर इस पहल को नियमित व्यवहार में बदलने पर है। प्रशासन चाहता है कि सफाई केवल विशेष अभियानों तक सीमित न रहे, बल्कि नागरिकों की रोजमर्रा की आदत बने। नालियों, सार्वजनिक स्थानों और आसपास जमा पानी की नियमित सफाई से डेंगू के संभावित खतरे को कम किया जा सकता है। इस पहल के जरिए सरकार ने स्वच्छ, स्वस्थ और जागरूक पश्चिम बंगाल के लिए जनभागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया है।

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