Dattatreya Hosabale RSS : हिंदू राष्ट्र की नई परिभाषा और पाकिस्तान से बातचीत, क्या है होसबाले का विजन?

RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने हिंदू राष्ट्र की एक ऐसी परिभाषा सामने रखी है जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। पाकिस्तान के साथ संबंधों और सीमा विवादों के बीच होसबोले का यह विजन क्या भारत की विदेश नीति को प्रभावित करेगा? संघ की इस नई सोच के पीछे छिपे गहरे अर्थों को समझिए।

Dattatreya Hosabale RSS

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 13, 2026

Dattatreya Hosabale RSS : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह (राष्ट्रीय महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संघ का दृष्टिकोण स्पष्ट किया है। उन्होंने पाकिस्तान के साथ कूटनीतिक संबंधों से लेकर हिंदू राष्ट्र की अवधारणा और वैश्विक संघर्षों तक पर बेबाकी से अपनी राय रखी। होसबाले का मानना है कि जटिल परिस्थितियों में भी बातचीत के विकल्प खुले रहने चाहिए और भारत की सांस्कृतिक पहचान ही उसकी असली शक्ति है।

भारत-पाकिस्तान संबंध: कूटनीति के साथ ‘पीपल-टू-पीपल’ कनेक्ट पर जोर

दत्तात्रेय होसबाले ने भारत और पाकिस्तान के बीच जारी दशकों पुराने तनाव पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान के साथ संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए। होसबाले के अनुसार, जब राजनीतिक और सैन्य स्तर पर विश्वास की भारी कमी हो, तब ‘जनता से जनता के रिश्तों’ (People-to-People ties) की भूमिका अहम हो जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान के वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों और नागरिक समाज (Civil Society) के प्रतिनिधियों को आगे आना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि सांस्कृतिक रूप से हमारी जड़ें साझा हैं और हम कभी एक ही राष्ट्र का हिस्सा रहे हैं।

सनातन और हिंदू राष्ट्र: ‘धार्मिक राज्य नहीं, यह हमारी सांस्कृतिक पहचान है’

तमिलनाडु के नेता उदयनिधि स्टालिन द्वारा ‘सनातन धर्म’ को समाप्त करने वाले विवादास्पद बयान पर पलटवार करते हुए होसबाले ने कहा कि सनातन शाश्वत है। यह किसी के कहने मात्र से समाप्त नहीं होने वाला। हिंदू राष्ट्र के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस इसे बनाने की कोशिश नहीं कर रहा, क्योंकि भारत पहले से ही एक हिंदू राष्ट्र है। उन्होंने तर्क दिया कि ब्रिटिश काल में भी भारत की आत्मा हिंदू राष्ट्र ही थी। उनके अनुसार, ‘हिंदू राष्ट्र’ का अर्थ किसी ‘धार्मिक राज्य’ (Theocratic State) से नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान से है। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन करने से किसी की राष्ट्रीयता नहीं बदलती; जब तक राष्ट्रीयता एक है, तब तक कोई भी अलग नहीं है।

पश्चिम एशिया संघर्ष: सभ्यताओं की नहीं, संसाधनों और लालच की जंग

ईरान और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर होसबाले ने एक अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने इसे ‘सभ्यताओं का संघर्ष’ (Clash of Civilizations) मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह वास्तव में तेल, प्राकृतिक संसाधनों और वर्चस्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि विश्व के अधिकांश युद्ध लालच, अहंकार और दूसरों की भूमि पर कब्जा करने की मानसिकता के कारण होते हैं। इतिहास गवाह है कि सत्ता और संसाधनों के लिए संघर्ष हमेशा से रहे हैं। उन्होंने भविष्य की एक डरावनी तस्वीर पेश करते हुए आगाह किया कि अगला बड़ा संघर्ष पानी को लेकर हो सकता है। युद्ध मानवता को पूरी तरह नष्ट भले न करें, लेकिन ये मानव जीवन और वैश्विक व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल देते हैं।

प्रधानमंत्री की अपील और भारतीय जीवनशैली: सादगी और संयम का मंत्र

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेट्रोल-डीजल की बचत और सादगी अपनाने की अपील का समर्थन करते हुए होसबाले ने कहा कि भारतीय जीवन दर्शन हमेशा से संयम पर आधारित रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे युद्ध की स्थिति हो या शांति का समय, सादगी और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग भारतीय संस्कारों का हिस्सा होना चाहिए। वैश्विक संकट के दौर में यह और भी आवश्यक हो जाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत अपनी प्राचीन समझदारी और शांति के संदेश के जरिए दुनिया के बड़े देशों और नेताओं को सही दिशा दिखाने में सक्षम है।

शांति और संवाद ही भविष्य का मार्ग

दत्तात्रेय होसबाले के इन बयानों से स्पष्ट है कि संघ वैश्विक शांति और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा को प्राथमिकता देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कट्टरता के बजाय सांस्कृतिक एकता और संसाधनों के प्रति सम्मान ही मानवता को भविष्य के खतरों से बचा सकता है। पाकिस्तान के साथ संवाद की वकालत और हिंदू राष्ट्र की सांस्कृतिक व्याख्या, भविष्य की भारतीय कूटनीति और सामाजिक विमर्श के लिए एक नई दिशा प्रदान करती है।

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