CWG 2026: भारतीय मुक्केबाज प्रीति पवार ने कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के 54 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को एकतरफा अंदाज में हराकर भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता। इस उपलब्धि के साथ प्रीति ने पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में aस्वर्ण पदक हासिल किया और भारतीय दल के पदक अभियान को नई मजबूती दी। उनकी इस जीत से देशभर में खेल प्रेमियों के बीच खुशी का माहौल है।
भारत की झोली में आया छठा स्वर्ण पदक
प्रीति पवार की इस शानदार सफलता के साथ भारत के खाते में कॉमनवेल्थ गेम्स का छठा स्वर्ण पदक जुड़ गया। भारतीय खिलाड़ियों का विभिन्न खेलों में लगातार अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल रहा है और मुक्केबाजी में भी देश ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। प्रीति की जीत ने न केवल भारतीय दल का मनोबल बढ़ाया, बल्कि महिला मुक्केबाजी में भारत की बढ़ती ताकत को भी दुनिया के सामने साबित किया।
फाइनल में कनाडा की बॉक्सर पर रही पूरी तरह हावी
स्वर्ण पदक मुकाबले में प्रीति पवार ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उन्होंने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को किसी भी चरण में वापसी का मौका नहीं दिया। तीनों राउंड में भारतीय मुक्केबाज ने बेहतरीन तकनीक, तेज फुटवर्क और सटीक पंचों का प्रदर्शन किया। जजों ने भी उनके प्रदर्शन को बेहतर माना और मुकाबले का फैसला उनके पक्ष में गया। पूरे मुकाबले के दौरान प्रीति आत्मविश्वास से भरपूर नजर आईं और उन्होंने अपने अनुभव का शानदार प्रदर्शन किया।
हर मुकाबले में दिखाई दमदार फॉर्म
कॉमनवेल्थ गेम्स के पूरे अभियान के दौरान प्रीति पवार ने शानदार लय बनाए रखी। उन्होंने अपने सभी मुकाबलों में प्रभावशाली प्रदर्शन किया और हर चरण में मजबूत प्रतिद्वंद्वियों को हराते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। उनकी फिटनेस, तकनीक और आक्रामक रणनीति पूरे टूर्नामेंट में उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।
राउंड ऑफ-16 से शुरू हुआ जीत का सफर
प्रीति पवार ने अपने अभियान की शुरुआत राउंड ऑफ-16 से की, जहां उनका सामना डेबोरा मटेंजे से हुआ। इस मुकाबले में उन्होंने आत्मविश्वास के साथ खेलते हुए शानदार जीत दर्ज की। इस जीत ने उन्हें अगले दौर के लिए मजबूत शुरुआत दी और पूरे टूर्नामेंट में उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया।
क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में भी दिखाया दम
क्वार्टर फाइनल में प्रीति का मुकाबला नॉर्थ आयरलैंड की निकोल क्लाइड से हुआ। इस मुकाबले में भी उन्होंने बेहतरीन मुक्केबाजी का प्रदर्शन करते हुए जीत हासिल की। इसके बाद सेमीफाइनल में उनका सामना जाम्बिया की कैथरीन म्वापे से हुआ। प्रीति ने यहां भी शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने प्रतिद्वंद्वी को हराया और फाइनल में जगह पक्की कर ली।
फाइनल जीतकर पूरा किया गोल्डन सपना
फाइनल मुकाबले में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो के खिलाफ पूरी तरह संतुलित और आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने पहले राउंड से ही बढ़त बना ली और अगले दोनों राउंड में भी अपना दबदबा कायम रखा। मुकाबले के अंत में उन्हें विजेता घोषित किया गया और उन्होंने अपने करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक जीत लिया। यह जीत उनके लगातार परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम मानी जा रही है।
भारतीय मुक्केबाजी के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि
प्रीति पवार का यह स्वर्ण पदक भारतीय मुक्केबाजी के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उनकी सफलता युवा खिलाड़ियों, विशेषकर महिला मुक्केबाजों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। लगातार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय मुक्केबाजों के बेहतर प्रदर्शन से यह स्पष्ट हो रहा है कि देश में मुक्केबाजी का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है। प्रीति की इस ऐतिहासिक जीत ने भारत के पदक अभियान को मजबूती देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय मुक्केबाजी की प्रतिष्ठा भी बढ़ाई है।
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