Crude Oil Price: अमेरिका-ईरान सीजफायर का बड़ा असर, कच्चे तेल के दाम 19% गिरे, $100 के नीचे आया क्रूड

अमेरिका और ईरान के सीजफायर के बाद कच्चे तेल के दाम गिर गए हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल और गैस की किल्लत में राहत मिलने की संभावना है। होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही भी शुरू हो गई है।

Crude Oil Price

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 8, 2026

Crude Oil Price: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आज राहत भरी खबर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच 15 दिनों के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई है। युद्ध की आशंकाएं कम होने से अमेरिकी क्रूड ऑयल के दाम 19 प्रतिशत तक लुढ़क गए हैं, जो पिछले कई हफ्तों में सबसे बड़ी गिरावट है।

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अमेरिकी क्रूड और ग्लोबल मार्केट का हाल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सीजफायर के ऐलान के साथ ही तेल की कीमतों में “क्रैश” जैसी स्थिति देखी गई।

अमेरिकी क्रूड (WTI): इसके दाम में 26 डॉलर प्रति बैरल की सीधी गिरावट आई है। कल तक जो तेल 116 डॉलर प्रति बैरल पर बिक रहा था, वह आज 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।

उम्मीदें: इस गिरावट का वैश्विक बाजार ने स्वागत किया है। जानकारों का मानना है कि इससे न केवल पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे, बल्कि वैश्विक स्तर पर जारी LPG और LNG का संकट भी कम होगा।

खाड़ी देशों और ब्रेंट क्रूड में भी बड़ी गिरावट

सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल की कीमतों में भी भारी कमी आई है। बुधवार को बाजार खुलते ही कीमतें 100 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गईं।

ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): इसमें 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। अब इसका रेट 92.82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जबकि एक दिन पहले यह 109 डॉलर के पार था।

खाड़ी देशों के कच्चे तेल में करीब 18 डॉलर प्रति बैरल की कमी आई है, जिससे एशियाई देशों (विशेषकर भारत) को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

सीजफायर और वार्ता का नया दौर

7 अप्रैल की डेडलाइन खत्म होने से ठीक पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा कर दुनिया को चौंका दिया।

15 दिनों का ब्रेक: फिलहाल यह सीजफायर 2 हफ्ते के लिए है। इस दौरान दोनों पक्ष युद्ध के स्थायी समाधान पर चर्चा करेंगे।

इस्लामाबाद में चर्चा: ईरान ने समझौते के लिए 10 शर्तें रखी हैं। इन शर्तों पर 10 अप्रैल से पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होगी। इस वार्ता के नतीजे ही तय करेंगे कि भविष्य में युद्ध पूरी तरह खत्म होगा या नहीं।

क्यों शुरू हुआ था संघर्ष?

इस सैन्य संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए थे।

मुख्य विवाद: अमेरिका और इजरायल का दबाव था कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे और अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता (Range) को सीमित करे।

वार्ता की विफलता: तीन दौर की शांति वार्ता विफल होने के बाद युद्ध शुरू हुआ था, जो 7 अप्रैल तक जारी रहा। हालांकि ट्रंप ने ईरान को कई मौके दिए, लेकिन शर्तों पर सहमति न बन पाने के कारण तनाव चरम पर था।

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