Crude Oil Price : पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच व्याप्त तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया था। इस भू-राजनीतिक संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ा। भारतीय तेल कंपनियों को मजबूरन ईंधन की कीमतें बढ़ानी पड़ी थीं। हालांकि, अब राहत की किरण दिखाई दे रही है। युद्ध विराम के बाद वैश्विक हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमतें घटकर 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई हैं। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
सऊदी अरब का ऐतिहासिक निर्णय: कीमतों में भारी कटौती
भारत के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब से आई है। सऊदी अरब की दिग्गज तेल कंपनी ‘सऊदी अरामको’ ने अगस्त महीने के लिए एशियाई ग्राहकों हेतु अपने कच्चे तेल (अरब लाइट) की कीमतों में 11 डॉलर प्रति बैरल की ऐतिहासिक कटौती करने का ऐलान किया है। पिछले 26 वर्षों में यह अब तक की सबसे बड़ी कटौती है। यह रियायत भारतीय तेल विपणन कंपनियों—IOCL, BPCL और HPCL—के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस फैसले के बाद, अरब लाइट क्रूड अब क्षेत्रीय बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट पर उपलब्ध होगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना बना टर्निंग पॉइंट
कच्चे तेल की कीमतों में इस गिरावट के पीछे सबसे मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना है। तनाव के दौरान यह मार्ग बंद होने से तेल की आपूर्ति बाधित थी और ट्रांसपोर्टेशन लागत आसमान छू रही थी। अब युद्ध विराम के बाद इस मार्ग के खुलने से सऊदी अरामको ने अपने मुख्य बंदरगाह ‘रास तनुरा’ से शिपमेंट को युद्ध-पूर्व के स्तर के 90 प्रतिशत तक पहुँचा दिया है। आपूर्ति श्रृंखला सामान्य होने और परिवहन खर्च में कमी आने से एशियाई रिफाइनरियों के पास अब सस्ते कच्चे तेल के कई विकल्प मौजूद हैं, जो उपभोक्ताओं के लिए भी फायदेमंद साबित होंगे।
ओपेक प्लस का उत्पादन बढ़ाने से आपूर्ति में सुधार
सऊदी अरब के साथ-साथ ‘ओपेक प्लस’ (OPEC+) देशों ने भी अगस्त के लिए तेल उत्पादन कोटा बढ़ाने का बड़ा फैसला किया है। पूर्व में आपूर्ति ठप होने के कारण उत्पादन बढ़ाने का असर बाजार पर नहीं दिख रहा था, लेकिन अब समुद्री रास्ता साफ होने के बाद सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे प्रमुख देश अपनी पूरी क्षमता से तेल का उत्पादन और निर्यात कर रहे हैं। बाजार में तेल की प्रचुर उपलब्धता और बेहतर सप्लाई चेन के कारण कीमतें लगातार नरम बनी हुई हैं।
आम जनता को मिल सकती है महंगाई से बड़ी राहत
बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें 72 डॉलर प्रति बैरल या इससे नीचे बनी रहती हैं, तो यह भारतीय तेल कंपनियों के मुनाफे में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज कराएगा। इस मुनाफे का सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए सरकार पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की कटौती कर सकती है। वैश्विक बाजार में स्थिरता का यह दौर आम जनता के लिए महंगाई से राहत दिलाने वाला साबित हो सकता है।










