Crude Oil Price: क्या 200 डॉलर पहुंचेगा कच्चा तेल? भारत में पेट्रोल-डीजल पर बढ़ेगा दबाव

कच्चे तेल की कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। विटोल के सीईओ ने पश्चिम एशिया से सप्लाई बाधित होने पर चेतावनी दी है। भारत में पेट्रोल 165 और डीजल 155 रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। क्या यह आशंका सच होगी?

Crude Oil Price

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 9, 2026

Crude Oil Price:  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। दुनिया की प्रमुख स्वतंत्र तेल ट्रेडिंग कंपनियों में शामिल विटोल ग्रुप के सीईओ रसेल हार्डी ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया से तेल की आपूर्ति और बाधित हुई, तो क्रूड ऑयल का भाव 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। गुरुवार, 8 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड 104.28 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था। एक कारोबारी सत्र में इसकी कीमत 4.1 प्रतिशत बढ़ी। हालांकि, 200 डॉलर का स्तर संभावित जोखिम है, कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं।

तेल 200 डॉलर तक क्यों पहुंच सकता है?

लंदन में आयोजित एनर्जी इंटेलिजेंस फोरम में रसेल हार्डी ने तेल बाजार की मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा की। उनके मुताबिक, पश्चिमी देशों के उपलब्ध तेल भंडार में अतिरिक्त गुंजाइश सीमित होती जा रही है। ऐसे में मध्य पूर्व से लगातार तेल की आपूर्ति बेहद जरूरी है। यदि खाड़ी क्षेत्र से तेल निर्यात के मौजूदा रास्ते बाधित होते हैं, तो बाजार में आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन बढ़ सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आने का जोखिम पैदा होगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई कैसे जारी है?

मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति बनाए रखने में शिप-टू-शिप ट्रांसफर यानी एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल स्थानांतरित करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके तहत छोटे टैंकर तेल लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलते हैं और ओमान की खाड़ी में बड़े जहाजों पर तेल स्थानांतरित किया जाता है। हार्डी के अनुसार, हाल के सात से दस दिनों में इस क्षेत्र से प्रतिदिन लगभग 1.4 करोड़ बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पाद भेजे गए। इसमें करीब 1.2 करोड़ बैरल कच्चा तेल और 20 लाख बैरल रिफाइंड उत्पाद शामिल थे।

टैंकरों पर हमले और धमकियों से बढ़ा संकट

होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। टैंकरों पर हमलों और धमकियों के कारण समुद्री यातायात प्रभावित होने का खतरा है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को इस मार्ग से केवल सात कमोडिटी जहाज गुजरे, जो 23 जुलाई के बाद सबसे कम संख्या बताई गई। इसी दौरान कच्चे तेल का प्रवाह घटकर लगभग 1.01 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गया, जो युद्धकालीन उच्च स्तर से 27 प्रतिशत कम था। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

पेट्रोल-डीजल और दूसरे ईंधनों की कीमतों पर असर

यदि तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि डीजल, विमान ईंधन और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं। हार्डी के अनुसार, रिफाइनिंग क्षमता पर पहले से दबाव है। रूस के ऊर्जा ढांचे को हुए नुकसान और मध्य पूर्व में रिफाइनिंग गतिविधियों में व्यवधान से तैयार ईंधनों की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसका असर सर्दियों तक बने रहने की आशंका जताई गई है।

भारत में पेट्रोल 165 और डीजल 155 रुपये तक पहुंचने का अनुमान

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर काफी निर्भर है। यदि अंतरराष्ट्रीय क्रूड का भाव 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 225 से 250 डॉलर तक जाने की आशंका जताई गई है। ऐसी स्थिति में रुपये, महंगाई और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। एक अनुमान के मुताबिक, पेट्रोल 165 रुपये और डीजल 155 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, ये संभावित कीमतें हैं, निश्चित दरें नहीं। वास्तविक कीमतें सरकारी नीतियों, करों, विनिमय दर और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेंगी।

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