मिड-डे मील में गड़बड़ी पर सख्ती, खाली बोरों की राशि जमा नहीं करने पर महालेखाकार की आपत्ति

रांची  पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजना योजना) के तहत चावल के खाली बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है। इसे प्रधानाध्यापक या कोई शिक्षक अपने पास नहीं रख सकता। साथ ही स्कूलों को इसका पूरा हिसाब-किताब सरकार को देना है। महालेखाकार द्वारा कई जिलों में बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा नहीं होने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए हर हाल में राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी सभी जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों को यह राशि हर हाल में

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Published On :

जून 30, 2026

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रांची
 पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजना योजना) के तहत चावल के खाली बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा करना अनिवार्य है। इसे प्रधानाध्यापक या कोई शिक्षक अपने पास नहीं रख सकता। साथ ही स्कूलों को इसका पूरा हिसाब-किताब सरकार को देना है।

महालेखाकार द्वारा कई जिलों में बोरे की राशि सरस्वती वाहिनी के बैंक खाते में जमा नहीं होने पर आपत्ति व्यक्त करते हुए हर हाल में राशि जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसे लेकर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने भी सभी जिलों के जिला शिक्षा अधीक्षकों को यह राशि हर हाल में जमा करने को कहा है।
महालेखाकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 से लेकर 2025-26 तक मध्याह्न भोजन में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के हिसाब-किताब दुरुस्त नहीं होने तथा राशि जमा नहीं होने की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।

इस अवधि में चावल के उपयोग के बाद खाली बोरे के लिए प्रति बोरा 14.40 रुपये जमा किया जाना है। इस राशि का सही तरह से आकलन कर पूरी राशि को सरस्वती वाहिनी की बैंक खाते में जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही जिलों को इसकी रिपोर्ट देने के भी निर्देश दिए गए हैं। इस आशय के निर्देश मिलने के बाद कुछ जिलों में इसके पूर्व के वर्षों की राशि का भी हिसाब-किताब लिया जा रहा है।

बताते चलें कि स्कूलों को कुकिंग कास्ट के रूप में निर्धारित राशि दी जाती है, जबकि चावल एफसीआई के माध्यम से उपलब्ध कराए जाते हैं। चावल की राशि एफसीआई को झारखंड मध्याह्न भोजन प्राधिकरण द्वारा दी जाती है, जिसमें केंद्रांश की 60 प्रतिशत तथा राज्यांश की 60 प्रतिशत राशि होती है।

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