चंडीगढ़ में अवैध निर्माणों पर शिकंजा! Chandigarh Housing Board ने 32 हजार लोगों को भेजे नोटिस

चंडीगढ़. चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अवैध निर्माण और अतिक्रमण स्वयं हटाकर दंडात्मक कार्रवाई से बचें। बोर्ड अब तक करीब 32,000 नोटिस जारी कर चुका है, जिनमें भवन नियमों के उल्लंघन और सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों को चिन्हित किया गया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत इस महीने की शुरुआत में सीएचबी ने अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस उन मकान मालिकों को दिए गए हैं जिन्होंने स्वीकृत नक्शे से हटकर अतिरिक्त कमरे, स्टोर, छतों पर बालकनी या अन्य निर्माण किए

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Published On :

अप्रैल 22, 2026

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चंडीगढ़.

चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अवैध निर्माण और अतिक्रमण स्वयं हटाकर दंडात्मक कार्रवाई से बचें। बोर्ड अब तक करीब 32,000 नोटिस जारी कर चुका है, जिनमें भवन नियमों के उल्लंघन और सरकारी जमीन पर कब्जे के मामलों को चिन्हित किया गया है।

पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत इस महीने की शुरुआत में सीएचबी ने अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, नोटिस उन मकान मालिकों को दिए गए हैं जिन्होंने स्वीकृत नक्शे से हटकर अतिरिक्त कमरे, स्टोर, छतों पर बालकनी या अन्य निर्माण किए हैं। कई मामलों में अतिरिक्त खंभे खड़े कर मूल संरचना में बदलाव किया गया है, जो सुरक्षा के लिहाज से भी खतरा बताया गया है।

यूटी प्रशासन का कहना है कि यह अभियान भवन नियमों के पालन को सुनिश्चित करने और अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए चलाया जा रहा है। सेक्टर-41 और सेक्टर-45 में कुछ अवैध ढांचे पहले ही गिराए जा चुके हैं। इसके बाद सेक्टर 29 और 30 के मकानों को भी नोटिस जारी किया गया है जिसको लेकर इस समय यहां के निवासियों में हाहाकार मचा हुआ है।
सीएचबी ने अलाटियों को सलाह दी है कि वे जल्द से जल्द उल्लंघन हटाएं और भवन की मूल संरचना—जैसे खंभे, दीवारें और नींव—को अपने खर्च पर बहाल करें, साथ ही स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट जमा कराएं।

उच्च न्यायालय ने 28 नवंबर 2019 के आदेश में असुरक्षित इमारतों की जांच के लिए समिति बनाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 21 अप्रैल 2022 के फैसले में अदालत ने एक महीने के भीतर जरूरी संरचनात्मक सुधार करने और इसकी लागत संबंधित अलॉटियों से वसूलने को कहा था। इस बीच, 8 अप्रैल को सेक्टर-45 में तोड़फोड़ अभियान के दौरान स्थानीय लोगों और पुलिस के बीच झड़प हुई। मेयर सौरभ जोशी समेत कई पार्षद मौके पर पहुंचे और विरोध जताया, जिसके बाद अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया।

वहीं, सांसद मनीष तिवारी ने इस मुद्दे पर कहा है कि लोगों के घर तोड़ना समाधान नहीं है। उन्होंने जरूरत के मुताबिक किए गए बदलावों को नियमित करने के लिए व्यावहारिक नीति बनाने की मांग की है। वही हाउसिंग बोर्ड में रहने वाले लोग भी वन टाइम रहता की मांग कर रहे हैं। कब रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्मल दत्त का कहना है कि जब दूसरे राज्यों में वन टाइम राहत मिल सकती है तो चंडीगढ़ में क्यों नहीं। इस साल के अंत में नगर निगम चुनाव भी होने हैं ऐसे में जहां लोगों के मकान पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है वहीं राजनीति भी गरमाई हुई है।

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