मध्य प्रदेश में गौशालाओं की देखरेख करेंगे ऑस्ट्रेलिया और दुबई की संस्थाएं, 3 माह में सड़कों पर गायें नहीं दिखेंगी

भोपाल मध्य प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे गौवंश को स्थायी आसरा देने का वर्किंग प्लान और उसकी समय सीमा तय हो गई है. प्रदेश की मोहन सरकार में पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी है. विधानसभा में कांग्रेस नेता अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा द्वारा प्रदेश में निराश्रित पशुओं का मुद्दा ध्यानाकर्षण में उठाया था. चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को सुझाव दिया कि गौपालकों को प्रति गौवंश 40 रुपए के हिसाब से राशि दी जानी चाहिए. मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश में गौशालाओं के संचालन के

Wrriten By :

Editor

Published On :

फ़रवरी 25, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

भोपाल
मध्य प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे गौवंश को स्थायी आसरा देने का वर्किंग प्लान और उसकी समय सीमा तय हो गई है. प्रदेश की मोहन सरकार में पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी है. विधानसभा में कांग्रेस नेता अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा द्वारा प्रदेश में निराश्रित पशुओं का मुद्दा ध्यानाकर्षण में उठाया था. चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को सुझाव दिया कि गौपालकों को प्रति गौवंश 40 रुपए के हिसाब से राशि दी जानी चाहिए. मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश में गौशालाओं के संचालन के लिए दुबई और ऑस्ट्रेलिया की संस्थाएं भी आगे आई हैं.

कामधेनु निवास के लिए 7 स्थानों पर जमीन चिन्हित

पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश के लिए प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाओं कामधेनु निवास के लिए प्रदेश में 29 स्थान चयनित कर लिए गए हैं. उधर 7 स्थानों पर राजस्व विभाग द्वारा पशुपालन विभाग को जमीन आवंटित कर दी गई है. इसके तहत जबलपुर में 461 एकड़, रायसेन में 320 एकड़, सागर में 411 एकड़, अशोकनगर में 293 एकड, खरगौन में 133 और रीवा में 135 एकड़ भूमि आवंटन सहित 7 स्थान पर काम चल रहा है."

उन्होंने कहा कि "अगले 10 दिनों में गौशाला बनाने के लिए अनुबंध की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी. जल्द ही इनका भूमि पूजन किया जाएगा. मंत्री ने दावा किया कि देश में यह पहली योजना है, जिसमें निराश्रित गौवंश को रखा जाएगा. मंत्री ने कहा कि इनमें कई गौशालाएं ऐसी होंगी, जिसमें 20 हजार गौवंश को एक स्थान पर रखा जाएगा."

दुबई, ऑस्ट्रेलिया की संस्था ने भी डाला टेंडर

मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "स्वावलंबी गौशालाओं के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है. टेंडर प्रकिया में ऑस्ट्रेलिया और दुबई की भी 2 संस्थाओं द्वारा हिस्सा लिया जा रहा है. टेंडर प्रक्रिया अगले एक माह में पूरी कर ली जाएगी. गौशालाओं को पूरी तरह से तैयार होने में 2 साल का वक्त लेगा. इसके बाद एक भी गौवंश सड़क पर दिखाई नहीं देगा."

मंत्री ने सफाई दी कि "गौशालाओं को पूरी तरह से बनने के पहले ही गौवंशों को इनमें पहुंचाना शुरू कर दिया जाएगा. बरसात के पहले सभी गौवंशों को इनमें पहुंचा दिया जाएगा. इसके लिए जरूरी सुविधाएं जल्द से जल्द की जाएंगी."

    मंत्री को नेता प्रतिपक्ष का सुझाव आया पसंद

ध्यानाकर्षण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि "आमतौर पर दूध देना बंद कर देने के बाद किसान ही गौवंश को छोड़ देता है. जब सरकार गौशालाओं को प्रति गाय के हिसाब से 40 रुपए प्रतिदिन की राशि दे रही है, तो सीधी किसानों को यह राशि क्यों नहीं दी जाती. एआई के दौर में ऐसे पशुपालकों की निगरानी भी की जा सकती है." जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुझाव की तारीफ करते हुए कहा कि इस पर सरकार विचार करेगी.

Leave a Comment

2