Kerala Election Results 2026: दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राज्य केरल की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। 140 विधानसभा सीटों वाले इस राज्य में कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए करीब 90 सीटों पर बढ़त बना ली है। एक दशक के लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस गठबंधन ने एलडीएफ के किले को ढहाने में सफलता प्राप्त की है। यह जीत न केवल केरल के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि कांग्रेस के राष्ट्रीय मनोबल को बढ़ाने वाली भी साबित हुई है।
7 साल बाद टूटा ‘तीन का फेर’: कांग्रेस के पास अब होंगे 4 मुख्यमंत्री
इस जीत के साथ ही कांग्रेस ने एक विशेष रिकॉर्ड की बराबरी की है। साल 2019 के बाद यह पहली बार है जब देश में कांग्रेस के एक साथ चार मुख्यमंत्री होंगे। पिछले सात वर्षों से पार्टी ‘तीन के फेर’ में फंसी हुई थी। 2018 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब में सरकार होने के बाद पार्टी का ग्राफ नीचे गिरा था। बीच में कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल जैसे राज्य आए, लेकिन कभी राजस्थान तो कभी छत्तीसगढ़ हाथ से निकल गया। अब हिमाचल, तेलंगाना और कर्नाटक के बाद केरल चौथा राज्य होगा जहाँ कांग्रेस की सरकार होगी।
प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल का बढ़ता वर्चस्व
केरल की यह जीत गांधी परिवार और विशेषकर प्रियंका गांधी के लिए व्यक्तिगत तौर पर भी बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि वह यहीं से लोकसभा सांसद हैं। उनके निर्वाचन क्षेत्र और आसपास के इलाकों में कांग्रेस का प्रदर्शन काबिले तारीफ रहा है। इसके साथ ही, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की रणनीतियों ने भी कमाल दिखाया है। संगठन में दूसरे सबसे शक्तिशाली पद पर आसीन वेणुगोपाल के गृह राज्य में मिली इस जीत ने उनके कद को और मजबूत कर दिया है।
जीत के 5 मुख्य सूत्र: रणनीतिक गठबंधन और स्थानीय मुद्दे
कांग्रेस की इस बंपर जीत के पीछे पांच प्रमुख रणनीतियां रहीं जिन्होंने वामपंथियों के शासन को चुनौती दी:
- मजबूत गठबंधन: कांग्रेस ने छोटे स्थानीय दलों को साथ जोड़कर वोटों का बिखराव रोका।
- गुटबाजी पर लगाम: सीएम पद की आपसी कलह को दरकिनार कर केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथल्ला और वीडी सतीशन एक साथ मंच पर नजर आए।
- अल्पसंख्यक वोटों का ध्रुवीकरण: बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने मुस्लिम और ईसाई मतदाताओं को अपने पक्ष में एकजुट किया।
- नए चेहरों पर दांव: पार्टी ने पुराने दिग्गजों के बजाय युवाओं और नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा।
- युवा नेताओं की फौज: सचिन पायलट और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे नेताओं ने युवा और प्रबुद्ध मतदाताओं के बीच सीधा संवाद किया और 80 वर्षीय पिनाराई विजयन की सरकार के खिलाफ माहौल बनाया।
केरल से दिल्ली तक उत्साह: कांग्रेस के लिए संजीवनी
दिसंबर 2022 में हिमाचल की जीत के बाद कर्नाटक और तेलंगाना ने पार्टी को उम्मीद दी थी, लेकिन छत्तीसगढ़ और राजस्थान की हार ने उसे वापस तीन राज्यों पर समेट दिया था। अब 2026 के केरल नतीजों ने कांग्रेस मुख्यालय में जश्न का माहौल पैदा कर दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दक्षिण भारत के इन तीन प्रमुख राज्यों (कर्नाटक, तेलंगाना, केरल) में पकड़ मजबूत होने से 2029 की राह कांग्रेस के लिए और अधिक स्पष्ट हो सकती है। सत्ता परिवर्तन की यह लहर केरल की जनता के बदले हुए मिजाज की कहानी बयां कर रही है।
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