PM Modi Address to Nation : PM मोदी के भाषण पर कांग्रेस की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का आरोप

क्या प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन चुनाव जीतने का जरिया बन गया है? कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर गंभीर आरोप लगाए हैं कि पीएम मोदी ने सरकारी चैनलों का इस्तेमाल विपक्षी दलों को निशाना बनाने के लिए किया। आखिर क्या है 'सेक्शन 123(7)' का वो पेंच जो मोदी की मुश्किल बढ़ा सकता है?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 22, 2026

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PM Modi Address to Nation  : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दूरदर्शन और संसद टीवी पर दिए गए एक हालिया संबोधन ने अब कानूनी रूप ले लिया है। कांग्रेस सांसद टीएन प्रथापन ने इस मामले को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अपनी याचिका में उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने चुनाव अवधि के दौरान सरकारी मशीनरी और सार्वजनिक धन से चलने वाले ब्रॉडकास्टिंग चैनलों का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक बयानबाजी के लिए किया है। प्रथापन का मुख्य तर्क यह है कि दूरदर्शन और संसद टीवी पूरी तरह से सरकारी खजाने (टैक्सपेयर्स मनी) से वित्त पोषित हैं और इनका उपयोग किसी भी दल विशेष के राजनीतिक लाभ या विपक्ष को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

आचार संहिता के उल्लंघन का दावा: 18 अप्रैल का वह संबोधन

याचिका में 18 अप्रैल की रात साढ़े 8 बजे प्रसारित हुए प्रधानमंत्री के भाषण का विशेष उल्लेख किया गया है। यह संबोधन नारी शक्ति वंदन विधेयक (महिला आरक्षण विधेयक) से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के तत्काल बाद दिया गया था। कांग्रेस सांसद के अनुसार, जिस समय यह भाषण प्रसारित हुआ, उस दौरान सक्रिय चुनावी माहौल बना हुआ था। ऐसे संवेदनशील समय में सरकारी नियंत्रण वाले टेलीविजन चैनलों के जरिए विपक्षी दलों की सीधी आलोचना करना ‘आदर्श आचार संहिता’ का स्पष्ट उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का मानना है कि चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित नियमों के तहत सत्ताधारी दल को सरकारी संसाधनों का लाभ लेने की अनुमति नहीं है, जो निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया को प्रभावित करती हो।

विपक्षी दलों के नाम लेकर प्रहार: याचिका में उठाए गए गंभीर सवाल

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान किसी एक नहीं, बल्कि कई प्रमुख विपक्षी दलों को निशाने पर लिया था। याचिका में दर्ज है कि पीएम ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रमुक (DMK) और समाजवादी पार्टी (SP) जैसे दलों का नाम लेते हुए उनकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने इन दलों पर नारी शक्ति वंदन प्रस्ताव का विरोध करने का आरोप लगाया और देश के मतदाताओं से अपील की कि वे इन पार्टियों को चुनाव में जवाबदेह ठहराएं। प्रथापन की आपत्ति इसी बात पर है कि सरकारी मंच का उपयोग मतदाताओं को विपक्षी दलों के खिलाफ लामबंद करने के लिए किया गया, जो लोकतंत्र में स्वस्थ परंपरा नहीं है।

चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग: सांसद प्रथापन की दलील

केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रथापन ने अपनी अर्जी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि अदालत भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को यह निर्देश दे कि वह 18 अप्रैल के राष्ट्र के नाम संबोधन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। सांसद का कहना है कि यदि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति सरकारी मंचों का उपयोग चुनाव प्रचार की तरह करेंगे, तो विपक्षी दलों के लिए समान अवसर (Level Playing Field) की स्थिति समाप्त हो जाएगी। उन्होंने इस संबोधन को राजनीतिक शुचिता के खिलाफ बताया है।

महिला आरक्षण विधेयक और राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पारित होने में आने वाली बाधाओं के बाद शुरू हुआ। पीएम मोदी ने इस असफलता के लिए विपक्ष की नकारात्मक राजनीति को जिम्मेदार ठहराया था। अपने संबोधन में उन्होंने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर विपक्ष को ‘महिला विरोधी’ के रूप में चित्रित करने का प्रयास किया था। अब जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत सरकारी चैनलों की स्वायत्तता और चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन के अधिकारों पर क्या रुख अपनाती है। यह याचिका आने वाले समय में राजनीतिक विज्ञापनों और सरकारी प्रचार की परिभाषा को भी प्रभावित कर सकती है।

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