अनुकंपा नियुक्ति में नौकरी में प्राथमिकता मिलेगी, लेकिन संपत्ति का हक नहीं: हाईकोर्ट

इंदौर  अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकलपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति संपत्ति का अधिकार नहीं, बल्कि संकटग्रस्त परिवार को तात्कालिक राहत देने की योजना है। कोर्ट ने पिता की नौकरी पर दावा करने वाली बेटी की याचिका खारिज कर दी। रतलाम जिला अस्पताल में पदस्थ ड्राइवर रमेशवान गोस्वामी का 22 जून 2020 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद पुत्र रितेश वान ने दिसंबर 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। इसी पद पर रितेश की बहन और रमेशवान की बेटी अनीता वान ने भी दावा

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Published On :

मई 6, 2026

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इंदौर 

अनुकंपा नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस जयकुमार पिल्लई की एकलपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति संपत्ति का अधिकार नहीं, बल्कि संकटग्रस्त परिवार को तात्कालिक राहत देने की योजना है। कोर्ट ने पिता की नौकरी पर दावा करने वाली बेटी की याचिका खारिज कर दी। रतलाम जिला अस्पताल में पदस्थ ड्राइवर रमेशवान गोस्वामी का 22 जून 2020 को सेवा के दौरान निधन हो गया था।

इसके बाद पुत्र रितेश वान ने दिसंबर 2021 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। इसी पद पर रितेश की बहन और रमेशवान की बेटी अनीता वान ने भी दावा प्रस्तुत किया। दोनों के दावे सामने आने पर विभाग ने 23 जनवरी 2024 और 6 फरवरी 2024 को पत्र जारी कर सक्सेशन सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने को कहा। इसे चुनौती देते हुए भाई-बहन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

दोनों पक्षों ने रखे तर्क
रितेश की ओर से दलील दी गई कि उनका नाम पिता ने सेवा के दौरान नामिनी के तौर पर शामिल किया था। पूरा परिवार पिता की आय पर निर्भर था और उनकी बहन शादीशुदा होने के कारण अलग रहती है। अनीता हलफनामा देकर उन्हें नियुक्ति की सहमति दे चुकी है। अनीता ने खुद को वैध वारिस बताते हुए सेवा लाभों में बराबरी का अधिकार जताया और नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट को फर्जी बताया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के उस सिद्धांत का हवाला भी दिया, जिसमें कहा है कि नामिनी संरक्षक होता है, मालिक नहीं। सरकार की ओर से दलील दी थी कि दोनों के दावे होने के कारण सही वारिस तय करने के लिए सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगा गया।

नीति में सबकुछ स्पष्ट
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि अनुकंपा नियुक्ति में सक्सेशन सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं होती। यह नियुक्ति राहतकारी नीति है। विभाग द्वारा सक्सेशन सर्टिफिकेट मांगना मनमाना और कानून के विपरीत है। हाईकोर्ट ने कहा कि 2014 में अनुकंपा नियुक्ति नीति बनी थी। कर्मचारी की मृत्यु 2020 में हुई थी, इसलिए उस समय की नीति ही लागू होगी।

2023 में नीति में हुआ बदलाव इस पर लागू नहीं होगा। 2014 की नीति में अनुकंपा नियुक्ति के लिए प्राथमिकता क्रम तय है। इसमें पति/पत्नी, फिर पुत्र या अविवाहित पुत्री, उसके बाद विधवा-तलाकशुदा पुत्री और अंत में कोर्ट ने निर्देश दिया कि नियुक्ति से पहले रितेश को हलफनामा देना होगा कि वे अपनी मां और अन्य आश्रितों का भरण-पोषण करेंगे। यदि वे ऐसा करने में असफल रहते हैं तो उनकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है।

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