आवारा कुत्तों पर टिप्पणी पड़ी भारी, सुप्रीम कोर्ट ने शर्मिला टैगोर को दिखाई जमीनी सच्चाई

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने इसे पूरी तरह से वास्तविकता से कटा हुआ करार दिया। एससी ने उनके वकील की ओर से दिए गए उदाहरणों को एक-एक कर खारिज करते हुए कहा, 'सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की मौजूदगी को महिमामंडित करने की कोशिश न की जाए।' एम्स परिसर में वर्षों से रह रहे एक कुत्ते गोल्डी के उदाहरण पर कोर्ट ने यह टिप्पणी की। बेंच ने कहा, 'आप वास्तविकता से पूरी तरह अलग हैं। अस्पतालों में इन कुत्तों को महिमामंडित न

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Published On :

जनवरी 9, 2026

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नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर के तर्कों को खारिज कर दिया। अदालत ने इसे पूरी तरह से वास्तविकता से कटा हुआ करार दिया। एससी ने उनके वकील की ओर से दिए गए उदाहरणों को एक-एक कर खारिज करते हुए कहा, 'सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों की मौजूदगी को महिमामंडित करने की कोशिश न की जाए।' एम्स परिसर में वर्षों से रह रहे एक कुत्ते गोल्डी के उदाहरण पर कोर्ट ने यह टिप्पणी की। बेंच ने कहा, 'आप वास्तविकता से पूरी तरह अलग हैं। अस्पतालों में इन कुत्तों को महिमामंडित न करें।' कोर्ट ने चेतावनी दी कि सड़क पर रहने वाले किसी भी कुत्ते में टिक्स होने की संभावना होती है, जो अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों में गंभीर हो सकते हैं।

शर्मिला टैगोर के वकील ने तर्क दिया कि आक्रामक कुत्तों को पहले विशेषज्ञ समिति की ओर से पहचाना जाना चाहिए। इसके बाद कोई कदम उठाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि कुत्तों के व्यवहार का आकलन करने के लिए एक्सपर्ट्स कमिटी गठित की जाए और आक्रामक व सामान्य कुत्तों में अंतर किया जाए। साथ ही, काटने वाले कुत्तों की पहचान के लिए कलर-कोडेड कॉलर का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा गया, जैसा कि जॉर्जिया और आर्मेनिया जैसे देशों में किया जाता है। हालांकि, कोर्ट ने इस पर भी आपत्ति जताई और पूछा कि उन देशों की जनसंख्या क्या है। आपको हकीकत देखनी चाहिए।

अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा
सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप केवल उन क्षेत्रों में होना चाहिए जहां विधायिका ने जानबूझकर कानून नहीं बनाया है। उन्होंने अरावली पहाड़ियों के मामले का हवाला देते हुए चेताया कि बिना डोमेन विशेषज्ञों के समिति के फैसले से नई व्यवस्था खड़ी हो सकती है। कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनते हुए मामले की सुनवाई जारी रखी है, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन पर जोर दिया जा रहा है।

 

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