UP News: सीतापुर रोड स्थित ब्रज की रसोई परिसर में आयोजित भव्य श्रीराम कथा के समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और राष्ट्रहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर मुखरता से अपने विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने इस धार्मिक मंच से देश की अस्मिता और सांस्कृतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया।
राष्ट्र की आत्मा और संस्कारों के प्रति निष्ठा की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि भारत की पवित्र धरती कोई धर्मशाला नहीं है, जहां कोई भी आकर इसके अस्तित्व को नुकसान पहुंचाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो व्यक्ति भारत की अनमोल संस्कृति, समृद्ध विरासत और इसके नैतिक मूल्यों का सम्मान करेगा, वही यहां आदर के साथ रह सकेगा। सीएम योगी ने आगे जोड़ा कि जो लोग भारत की आत्मा और यहाँ के संस्कारों को स्वीकार करने में संकोच करते हैं, उनके लिए इस देश में कोई स्थान नहीं है।
पूज्य संतों के प्रति आदर और समाज सेवा का अनुपम उदाहरण
मुख्यमंत्री ने पद्म विभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य महाराज के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चित्रकूट में देश के पहले दिव्यांग विश्वविद्यालय की स्थापना करके स्वामी जी ने सेवा और समर्पण का एक अद्वितीय उदाहरण पेश किया है। इस आयु में भी वे विश्राम करने के बजाय लोकमंगल और राष्ट्रकल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत हैं तथा देश-विदेश में श्रीराम कथा के माध्यम से व्यापक जनजागरण का कार्य कर रहे हैं।
प्रभु श्रीराम की महिमा और राष्ट्रीय एकता का अटूट सूत्र
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन किसी एक व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का आंदोलन नहीं था, बल्कि यह देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का विषय था। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का नाम वह पावन सूत्र रहा है, जिसने उत्तर से लेकर दक्षिण तक पूरे देश को हमेशा एकजुट बनाए रखने का कार्य किया। यदि व्यक्ति भगवान राम के आदर्शों का थोड़ा-सा अंश भी अपने जीवन में उतार ले, तो समाज और राष्ट्र का कल्याण सुनिश्चित है।
अधर्म व अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की पौराणिक प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने धर्मग्रंथों और पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास हमें सज्जन शक्ति को संगठित करने तथा अधर्म और अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कंस और मारीच का उदाहरण देते हुए समझाया कि गलत संगति और स्वार्थपूर्ण सलाह हमेशा समाज और राष्ट्र का विनाश करती है। सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि कंस और खर-दूषण जैसे लोग जमीन कब्जाने का काम करते थे, जहाँ भी खाली जगह देखते थे, अपना तंबू तान लेते थे।
सामाजिक समरसता और देश को मजबूत करने का संत संदेश
सीएम योगी ने देश को बांटने वाली ताकतों पर प्रहार करते हुए कहा कि आज कुछ शक्तियां समाज को जाति, क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजित करने का कुत्सित प्रयास कर रही हैं। इसके विपरीत, हमारा संत समाज सदैव लोगों को आपस में जोड़ने और राष्ट्र को मजबूत करने का कार्य करता है। प्रभु श्रीराम और संतों का सानिध्य ही व्यक्ति को जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की सच्ची प्रेरणा देता है।
राष्ट्र कल्याण की कामना और जय श्रीराम का उद्घोष
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज को सादर नमन किया। उन्होंने स्वामी जी के आगामी साधना पर्व की पूर्ण सफलता तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की। इसके बाद, मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित विशाल जनसमूह और श्रद्धालुओं को ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी उद्घोष के साथ अपनी शुभकामनाएं दीं और कथा का विधि-विधान से समापन हुआ।










