CM Yogi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 14 फरवरी, 2026 को अपने एक बयान से सबका ध्यान खींचा। गोरखपुर के जंगल कौड़िया ब्लॉक में पुनर्निर्मित बीडीओ कार्यालय के उद्घाटन समारोह में उन्होंने दिल्ली की वायु गुणवत्ता की तुलना ‘गैस चैंबर’ से की। साथ ही उन्होंने प्रदेश में पर्यावरण और विकास पर भी अपने विचार साझा किए।
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दिल्ली की हवा ‘गैस चैंबर’ जैसी
सीएम योगी ने कहा कि राजधानी दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) गंभीर स्तर पर है। उनका कहना था कि वहाँ की हवा में सांस लेना मुश्किल है और आंखों में जलन होती है। उन्होंने कहा, “डॉक्टरों की राय है कि अस्थमा और अन्य श्वसन रोगों से ग्रसित बुजुर्ग और बच्चे घर से बाहर न निकलें। क्या यही जिंदगी है?” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पर्यावरण के साथ खिलवाड़ होता रहा तो ऐसी ही परिस्थितियाँ उत्पन्न होती रहेंगी।
उन्होंने इसके विपरीत यूपी के वातावरण का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश में तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन यहाँ का माहौल दमघुट नहीं है और पर्यावरण में संतुलन बना हुआ है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रदूषण के बिना बीमारियों का खतरा कम होता है और लोगों को स्वस्थ जीवन मिलता है।
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पर्यावरण की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज की दुनिया में सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण को होने वाले नुकसान की है। उन्होंने कहा, “अगर ऑक्सीजन देने वाली मशीनें खराब हो जाएँगी, तो शरीर पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा। पर्यावरण संरक्षण के बिना कोई भी समाज स्वस्थ नहीं रह सकता।” सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण और विकास को संतुलित रखना जरूरी है। यूपी में विकास तो तेज है, लेकिन लोगों को घुटन भरा माहौल नहीं झेलना पड़ता। यह संतुलन प्रदेश की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
जंगल कौड़िया ब्लॉक में बीडीओ कार्यालय का उद्घाटन
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुनर्निर्मित बीडीओ कार्यालय का उद्घाटन किया और उपस्थित जनता को संबोधित किया। उन्होंने कैम्पियरगंज में बने गिद्धराज जटायु संरक्षण केंद्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता का भाव महत्वपूर्ण है। मानव जाति पर गिद्धराज जटायु की कृपा रही है। माता सीता का हरण करते समय उनका पहला प्रतिकार जटायु ने किया था।
सीएम योगी ने चेताया कि रासायनिक पदार्थों और कीटनाशकों के अधिक उपयोग के कारण गिद्धराज की संख्या घटती जा रही है। इसलिए उन्हें संरक्षण देना जरूरी है। संरक्षण केंद्र बनाने का उद्देश्य यही है कि आने वाली पीढ़ियाँ प्रकृति और वन्य जीवों के महत्व को समझें।









