सीएम यादव का नया कदम, हर सरकारी अस्पताल में ‘गर्भ संस्कार’ कक्ष अनिवार्य, 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज भी होंगे

इंदौर   सीएम मोहन यादव ने प्रदेश के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। यह पहल 'दिव्य संतान प्रकल्प' के तहत 'गर्भ संस्कार' को बढ़ावा देगी। इसका मकसद बच्चों के जन्म से पहले ही उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को मजबूत बनाना है। यह पहल आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष मंत्रालय के सहयोग से लागू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताए फायदे सीएम यादव ने इंदौर में 'दिव्य संतान प्रकल्प' कार्यक्रम में कहा कि गर्भ संस्कार एक ऐसी प्रक्रिया है जो आने वाली पीढ़ी को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि यह

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Published On :

फ़रवरी 2, 2026

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इंदौर 

 सीएम मोहन यादव ने प्रदेश के लिए एक नई पहल की घोषणा की है। यह पहल 'दिव्य संतान प्रकल्प' के तहत 'गर्भ संस्कार' को बढ़ावा देगी। इसका मकसद बच्चों के जन्म से पहले ही उनके शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास को मजबूत बनाना है। यह पहल आयुष्मान भारत योजना के तहत आयुष मंत्रालय के सहयोग से लागू की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताए फायदे
सीएम यादव ने इंदौर में 'दिव्य संतान प्रकल्प' कार्यक्रम में कहा कि गर्भ संस्कार एक ऐसी प्रक्रिया है जो आने वाली पीढ़ी को शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाती है। उन्होंने बताया कि यह आधुनिक विज्ञान और भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों का एक मेल है। इसे राष्ट्र निर्माण में एक लंबे समय का निवेश माना जाना चाहिए।

अस्पतालों में बनेंगे अलग कमरे
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में राज्य के सरकारी अस्पतालों के डिज़ाइन में गर्भ संस्कार के लिए विशेष कमरे बनाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि एलोपैथी के डॉक्टर भी अब व्यापक प्रसव पूर्व देखभाल के फायदों को स्वीकार कर रहे हैं।

13 आयुर्वेदिक कॉलेज खुलेंगे
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर जोर देते हुए, यादव ने कहा कि राज्य सामान्य प्रसव को बढ़ावा दे रहा है और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में 13 नए आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जाएंगे। यह आजादी के बाद पहली बार है जब इतने सारे आयुर्वेदिक कॉलेज खोले जा रहे हैं। इनमें से आठ कॉलेज एक साल के भीतर चालू हो जाएंगे।

अभिमन्यु और अष्टावक्र का दिया उदाहरण
मुख्यमंत्री ने गर्भ संस्कार की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में अभिमन्यु और अष्टावक्र जैसे उदाहरण हैं। इनसे पता चलता है कि गर्भ में ही मूल्यों, सीखने और संस्कारों को ग्रहण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि COVID-19 महामारी ने एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण की प्रभावशीलता को दिखाया है, जहां आयुर्वेद और एलोपैथी एक दूसरे के पूरक थे। उन्होंने पारंपरिक ग्रामीण जीवन शैली, भारतीय रसोई और स्वदेशी आहार के वैज्ञानिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।

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