CM Pushkar Dhami: सड़क पर नमाज वाले बयान पर भड़के मौलाना बरेलवी, उत्तराखंड के सीएम धामी को दिया करारा जवाब

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी के 'सड़क पर नमाज' वाले बयान पर तीखा पलटवार किया है।

CM Pushkar Dhami

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

मई 23, 2026

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CM Pushkar Dhami: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सड़कों पर नमाज पढ़े जाने को लेकर दिए गए एक बयान पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बेहद तीखी और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अत्यधिक मजबूरी की स्थिति को छोड़ दिया जाए, तो आम दिनों में मुसलमान कभी भी सड़कों पर नमाज अदा नहीं करते हैं।

न्यूज एजेंसी से विशेष बातचीत करते हुए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुख्यमंत्री धामी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का जो बयान सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर आया है, उसके जवाब में मैं उनसे सीधे तौर पर कहना चाहता हूं कि मुसलमान कभी भी जानबूझकर सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ते। चाहे वह ईद हो, बकरीद हो, जुम्मे (शुक्रवार) की नमाज हो या फिर पांच वक्त की नियमित नमाज—मुसलमान हमेशा मस्जिदों के भीतर ही इबादत करते हैं।”

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‘बहुसंख्यक समुदाय को खुश करने के लिए उठाया जा रहा है अनावश्यक मुद्दा’

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस बयान के पीछे की राजनीतिक मंशा पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा विवाद राजनीतिक लाभ लेने और बहुसंख्यक समाज को रिझाने के लिए खड़ा किया जा रहा है।

मौलाना ने नमाज के आध्यात्मिक पहलू को समझाते हुए कहा कि इस्लाम के नियमों के मुताबिक, नमाज पढ़ने वाले (नमाजी) और खुदा के बीच में कोई भी रुकावट या व्यवधान नहीं होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सड़कों पर चलने वाले वाहनों और सार्वजनिक कोलाहल के बीच एकाग्रता के साथ नमाज पढ़ना संभव ही नहीं है। इसी वजह से देश का मुसलमान मस्जिदों और ईदगाहों के शांत माहौल में ही इबादत करना पसंद करता है। मौलाना ने तंज कसते हुए कहा कि एक राज्य के मुख्यमंत्री होने के नाते पुष्कर सिंह धामी को इस बुनियादी बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए।

दिल्ली और बंगाल में ‘कुर्बानी’ विवाद पर बोले मौलाना- ‘सदियों पुरानी है यह परंपरा’

सड़कों पर नमाज के मुद्दे के अलावा मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने देश के कुछ हिस्सों, विशेषकर पश्चिम बंगाल और दिल्ली में आगामी त्योहार को लेकर चल रहे ‘कुर्बानी विवाद’ पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 28 मई को देश भर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार मनाया जाएगा और इस मौके पर दी जाने वाली कुर्बानी सदियों से चली आ रही एक पवित्र धार्मिक परंपरा है। उन्होंने उन अफवाहों का पूरी तरह खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा है कि भारत में कुर्बानी पर किसी भी तरह का प्रतिबंध लगाया गया है।

मुस्लिम समुदाय को मौलाना की नसीहत

त्योहार के दौरान देश में सांप्रदायिक सौहार्द और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने मुस्लिम समाज के लिए कुछ जरूरी और व्यावहारिक दिशा-निर्देश भी जारी किए।

उन्होंने विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग सार्वजनिक स्थानों, सड़कों या खुले मैदानों में कुर्बानी देने से पूरी तरह परहेज करें। कुर्बानी की इस प्रक्रिया को या तो पूरी तरह से ढके हुए निजी स्थानों पर अंजाम दिया जाए या फिर सरकार द्वारा अधिकृत स्लॉटर हाउस (बूचड़खानों) का ही उपयोग किया जाए।

इसके साथ ही उन्होंने सख्त हिदायत दी कि किसी भी ऐसे प्रतिबंधित मवेशी की कुर्बानी न दी जाए, जिससे देश के कानून का उल्लंघन होता हो या जिससे दूसरे धर्म के लोगों की धार्मिक आस्था और भावनाओं को ठेस पहुंचती हो। मौलाना ने कहा कि आपसी भाईचारे को बनाए रखना और कानून के दायरे में रहकर त्योहार मनाना ही इस्लाम की सच्ची सीख है।

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