CJP Protest: दिल्ली में सोमवार को हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बड़े विरोध प्रदर्शन और उस दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज का संवेदनशील मामला अब देश की राजधानी की शीर्ष अदालत यानी दिल्ली हाई कोर्ट की दहलीज तक पहुंच गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली हाई कोर्ट ने एक बेहद कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। कोर्ट ने दो टूक शब्दों में याचिकाकर्ता से कहा कि कानून-व्यवस्था और राजनीतिक विरोध से जुड़े इस प्रकार के मामलों में अदालत को जबरन नहीं ‘घसीटा’ जाना चाहिए। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पुलिसिया बल प्रयोग के खिलाफ दायर की गई याचिका पर तत्काल सुनवाई (Urgent Listing) करने से साफ तौर पर इनकार कर दिया।
उल्लेखनीय है कि सोमवार (20 जुलाई 2026) को दिल्ली की सड़कों पर संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच भारी झड़प हुई थी, जिससे स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई थी। इस झड़प के बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया था, जिसके विरोध में अधिवक्ताओं के माध्यम से कोर्ट में गुहार लगाई गई थी। हालांकि, अदालत ने इस विषय की गंभीरता को देखते हुए इसे नियमित प्रक्रिया के तहत ही सुनने का फैसला किया है।
Haryana News: अनिल विज का बड़ा बयान, कांग्रेस के आंदोलन पर साधा निशाना
जस्टिस उपाध्याय और जस्टिस करिया की बेंच की सख्त टिप्पणी
इस मामले की सुनवाई जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की खंडपीठ (Bench) के समक्ष हुई। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और नागरिकों पर बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाईं और बल का अत्यधिक प्रयोग किया, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं। इसलिए इस मानवाधिकार उल्लंघन के मामले पर अदालत को तुरंत दखल देना चाहिए।
इस दलील पर पीठ ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “इस मामले की नियमित सुनवाई बुधवार (22 जुलाई 2026) को तय की जाएगी। कृपया हर प्रशासनिक और राजनीतिक मामले में कोर्ट को बीच में न घसीटें।” हालांकि, इसी प्रदर्शन से जुड़ी एक अन्य बेहद महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने बड़ा मानवीय फैसला सुनाया। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर याचिका पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक को तत्काल बेहतर इलाज के लिए मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम में शिफ्ट करने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया।
केंद्र सरकार ने रखा अपना पक्ष
अदालती कार्यवाही के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने बेंच को आश्वस्त किया कि सरकार वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है। कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम लगातार सफदरजंग अस्पताल में उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और उनकी मेडिकल रिपोर्ट पर नजर बनाए हुए है।
दूसरी तरफ, सोनम वांगचुक के परिवार की ओर से गीतांजलि अंगमो ने अदालत में एक विस्तृत हलफनामा दाखिल किया। इस हलफनामे में वांगचुक की पुरानी मेडिकल रिपोर्ट्स और उन डॉक्टरों की विशेष सलाह को रिकॉर्ड पर रखा गया जो लंबे समय से लद्दाख में उनका इलाज कर रहे हैं। उनके वकील ने जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान तैनात डॉक्टरों का एक पत्र भी प्रस्तुत किया, जिसमें उनके गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें किसी सुपर-स्पेशियलिटी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की आवश्यकता बताई गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
पुलिस का दावा
दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने अदालत के समक्ष अपनी स्टेटस रिपोर्ट में प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सोमवार को मार्च के दौरान लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को बार-बार चेतावनी दी गई थी और लागू निषेधाज्ञा (धारा 144) का हवाला देकर पीछे हटने को कहा गया था। इसके बावजूद भीड़ ने निर्देशों का उल्लंघन किया।
पुलिस के मुताबिक, उग्र प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर भारी पथराव किया, नुकीली वस्तुओं से हमला किया और पुलिस बैरिकेड्स को जबरन तोड़ने का प्रयास किया। इसके अतिरिक्त, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को विवश होकर न्यूनतम बल (लाठीचार्ज) का प्रयोग करना पड़ा। कोर्ट अब इस पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा आगामी बुधवार को करेगा।
जालंधर दौरे पर CM नायब सैनी, दिव्य ज्योति संस्थान की समाजसेवा को बताया प्रेरणादायक










