CJP Protest : छात्रों पर कार्रवाई पर भड़के उद्धव ठाकरे, सोनम वांगचुक और CJP के समर्थन में उतरे

छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। उद्धव ठाकरे ने इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना करते हुए सोनम वांगचुक और CJP आंदोलन के समर्थन में खुलकर बयान दिया। उनके इस रुख के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। आखिर उन्होंने क्या कहा और इसका आगे क्या असर हो सकता है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

CJP Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 22, 2026

CJP Protest : राजधानी दिल्ली में छात्र आंदोलन और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों और छात्रों के प्रदर्शन के बाद विभिन्न विपक्षी दल केंद्र सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी छात्रों के समर्थन में अपनी प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं ने आंदोलन कर रहे युवाओं के प्रति एकजुटता जताते हुए पुलिस कार्रवाई और सरकार के रवैये की आलोचना की।

उद्धव ठाकरे ने छात्रों के समर्थन का किया दावा

दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनका समर्थन किसी राजनीतिक कारण से नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं की चिंताओं के प्रति है। उन्होंने कहा कि वे शुरुआत से ही आंदोलन से जुड़े युवाओं के साथ खड़े रहे हैं। ठाकरे ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की आवाज को सुना जाना चाहिए और उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, संवाद के माध्यम से समाधान निकालना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी होती है।

सरकार के रवैये पर उद्धव ठाकरे का निशाना

उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को अहंकार छोड़कर जनता की भावनाओं को समझना चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत होती है और जनभावनाओं की अनदेखी किसी भी सरकार के लिए उचित नहीं मानी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को विरोध को दबाने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।

ममता बनर्जी ने भी जताया छात्रों के प्रति समर्थन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दिल्ली में छात्रों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया। ममता बनर्जी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी छात्रों और विपक्ष के लोकतांत्रिक विरोध के साथ खड़ी है।

विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही की मांग उठाई

छात्र आंदोलन के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और यदि परीक्षा प्रणाली में किसी प्रकार की कमी है तो उसमें सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। विपक्षी नेताओं का मानना है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद आवश्यक है।

प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुआ विरोध प्रदर्शन

छात्रों के समर्थन में कई विपक्षी नेता प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर भी बैठे। इस विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान विपक्ष ने छात्रों के मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगा और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों की नजर बनी रही।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग

विपक्षी दलों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग भी दोहराई। उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवादों और छात्रों की नाराजगी के बीच सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया, जबकि सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

छात्र आंदोलन पर सियासत जारी रहने के आसार

छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था और कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर विपक्ष सरकार को घेरने का प्रयास कर रहा है, वहीं सरकार अपने कदमों को कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी के दायरे में बता रही है। आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक मंचों पर यह मुद्दा प्रमुखता से उठने की संभावना है। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और छात्रों के अधिकारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस और तेज हो सकती है।