CJP Protest Case: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने मीडिया में प्रसारित कुछ खबरों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि उन्होंने मामले को सूचीबद्ध (लिस्ट) करने से इनकार कर दिया, जबकि वास्तविक स्थिति इससे अलग थी। मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि संबंधित मामले में विधिवत कोई याचिका दायर ही नहीं की गई थी, इसलिए उसे सूचीबद्ध करने का प्रश्न ही नहीं उठता था। उन्होंने कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए खबरें प्रकाशित करना उचित नहीं है।
‘कोई याचिका दाखिल नहीं हुई थी’
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में केवल एक प्रतिनिधित्व (रिप्रेजेंटेशन) उनके संज्ञान में लाया गया था। उन्होंने बताया कि मीडिया में इस बात को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया कि अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश के अनुसार, जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से जानकारी ली तो पता चला कि उस समय तक मामले से संबंधित कोई औपचारिक याचिका या आवश्यक दस्तावेज दाखिल नहीं किए गए थे। ऐसे में अदालत के समक्ष विधिक प्रक्रिया पूरी न होने के कारण मामले को सूचीबद्ध करना संभव नहीं था।
सीजेआई ने मीडिया की कार्यशैली पर जताई नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय मीडिया को अधिक जिम्मेदारी और सावधानी बरतनी चाहिए। उनके अनुसार, बिना तथ्यों की पुष्टि किए यह प्रचारित कर दिया गया कि उन्होंने सुनवाई से इनकार कर दिया, जबकि ऐसा नहीं था। सीजेआई ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाह रिपोर्टिंग बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से जुड़े मामलों में तथ्यात्मक सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है और गलत रिपोर्टिंग से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।
‘लिस्टिंग से इनकार नहीं किया था’
सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने किसी विधिवत दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई याचिका नियमानुसार दाखिल की जाती है, तो उस पर कानून के अनुसार विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिस दस्तावेज का उल्लेख किया जा रहा था, वह केवल एक प्रतिनिधित्व था, जिसे किसी व्यक्ति द्वारा भेजा गया था। ऐसे प्रतिनिधित्व को स्वतः रिट याचिका नहीं माना जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई औपचारिक याचिका ही मौजूद नहीं थी, तो अदालत द्वारा सुनवाई से इनकार करने की खबर कैसे प्रसारित कर दी गई।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद 22 जुलाई को उस समय सामने आया, जब सुप्रीम कोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा ने अदालत के समक्ष दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ कथित मारपीट हुई और उनके पास इस संबंध में वीडियो सहित कुछ आवेदन मौजूद हैं। उन्होंने अदालत से मामले पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
तत्काल सुनवाई और नियमित प्रक्रिया में अंतर
मुख्य न्यायाधीश ने उस समय मामले पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार किया था। हालांकि, उन्होंने यह नहीं कहा था कि यदि मामला विधिवत दाखिल किया जाता है तो उस पर सुनवाई नहीं होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले को सूचीबद्ध करने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है। बिना याचिका और आवश्यक दस्तावेजों के अदालत कोई मामला सूचीबद्ध नहीं कर सकती।
तथ्यों की पुष्टि के बाद ही रिपोर्टिंग की अपील
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश भी दिया कि न्यायपालिका से जुड़े मामलों की रिपोर्टिंग करते समय तथ्यों की पुष्टि करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर प्रकाशित खबरें न केवल भ्रम पैदा करती हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की सही समझ को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए मीडिया संस्थानों को जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग करनी चाहिए और आधिकारिक रिकॉर्ड या अदालत की वास्तविक कार्यवाही के आधार पर ही समाचार प्रकाशित करने चाहिए।










