CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई और कथित लाठीचार्ज के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। इस घटना के बाद सिटिज़न्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के नेता अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने पुलिस बल के पुरुष कर्मियों द्वारा महिला और छात्रा प्रदर्शनकारियों पर कथित रूप से लाठीचार्ज किए जाने की कड़ी निंदा करते हुए सरकार पर गंभीर तानाशाही और गुंडागर्दी के आरोप लगाए हैं।
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पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा लड़कियों पर लाठीचार्ज का आरोप
समाचार एजेंसी ANI से बातचीत करते हुए CJP नेता अभिजीत दीपके ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को बेहद अमानवीय और क्रूर करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही लड़कियों और महिलाओं पर पुरुष पुलिस अधिकारियों द्वारा लाठियां बरसाई गईं।
अभिजीत दीपके ने तीखे शब्दों में केंद्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह सरकार नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े विवादों के दौरान कथित तौर पर 20 से अधिक छात्रों की जान जाने से भी संतुष्ट नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब यह सरकार देश के बाकी युवाओं और छात्रों का खून बहाने पर पूरी तरह से तुली हुई है। उनके अनुसार, शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ इस तरह का बर्ताव पूरी तरह से निंदनीय है।
जंतर-मंतर पर अभी भी जारी है धरना प्रदर्शन
लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के बावजूद विरोध प्रदर्शन थमता नजर नहीं आ रहा है। CJP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी साझा करते हुए बताया है कि अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि समेत कई प्रमुख लोग अभी भी जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण धरने पर डटे हुए हैं। संगठन के अनुसार, ये सभी इस समय केरल हाउस के सामने मौजूद हैं और उनका यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है।
CJP का तीखा बयान: ‘हमने तिरंगा उठाया, उन्होंने लाठी चलाई’
घटना के बाद CJP संगठन की ओर से सोशल मीडिया पर एक और आक्रामक पोस्ट साझा किया गया, जिसमें सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए गए हैं। इस पोस्ट में लिखा गया है, “हमने तिरंगा उठाया, उन्होंने लाठी उठाई। हमने किताब उठाई, उन्होंने आंसू गैस चलाई। हमने संविधान दिखाया, उन्होंने तानाशाही चलाई।” संगठन ने आगे कहा कि आज के इस दिन को इस बात के लिए हमेशा याद रखा जाएगा कि किस तरह से दिल्ली पुलिस ने सत्ता में बैठे लोगों के इशारे पर मासूम और शांतिपूर्ण स्टूडेंट्स को बेरहमी से पीटा है।
इस पूरी घटना के बाद से दिल्ली की राजनीतिक और सामाजिक फिजा एक बार फिर गर्म हो गई है। विपक्ष और विभिन्न छात्र संगठनों द्वारा पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ लगातार रोष व्यक्त किया जा रहा है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमाने के पूरे आसार हैं।
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