CJP Protest: जयपुर में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके पर हुए हमले के बाद उनकी पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी की आवाज दबाने के लिए शारीरिक हमला करना डर और असहिष्णुता का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं उनके आंदोलन को कमजोर नहीं कर सकतीं और वे आगे भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखते रहेंगे। दीपके ने कहा कि वे अहिंसा और संविधान में विश्वास रखते हैं तथा अपने संघर्ष को शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखेंगे।
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गांधी और आंबेडकर के विचारों पर चलने की बात
घटना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अभिजीत दीपके ने कहा कि वे महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों को मानने वाले व्यक्ति हैं। उनका मानना है कि समाज में बदलाव संवाद, विचार और लोकतांत्रिक संघर्ष के माध्यम से ही लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा समस्याओं का समाधान नहीं है। आंदोलन का उद्देश्य युवाओं की समस्याओं को सामने लाना है और इसके लिए वे शांति, प्रेम और संवैधानिक मूल्यों के रास्ते पर आगे बढ़ते रहेंगे।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई
अभिजीत दीपके ने एक बार फिर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। उनका कहना है कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रही खामियों के कारण लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
मनीष सिसोदिया ने भी घटना की निंदा की
इस घटना पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को हिंसा के जरिए दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
सिसोदिया ने कहा कि देश के लाखों युवा परीक्षा व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। ऐसे समय में आंदोलन कर रहे लोगों पर हमला करना बेहद गलत है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
आंदोलन की पृष्ठभूमि पर बोले दीपके
प्रदर्शन से पहले अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत के दौरान अपने आंदोलन की पृष्ठभूमि भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में लंबे समय से बेरोजगारी, भर्ती प्रक्रिया में देरी और परीक्षा घोटालों को लेकर नाराजगी मौजूद है। उनके अनुसार, यह आंदोलन केवल किसी एक संगठन का नहीं बल्कि उन युवाओं की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है जो रोजगार और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं।
बेरोजगारी और पेपर लीक को बताया बड़ी चुनौती
दीपके ने कहा कि देश में बेरोजगारी एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है। उन्होंने दावा किया कि कई प्रतियोगी परीक्षाएं विवादों में घिरी रही हैं और कई मामलों में पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा, जिन परीक्षाओं का आयोजन समय पर हो जाता है, उनके परिणाम आने में भी काफी समय लग जाता है। इससे उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित होता है और युवाओं में निराशा बढ़ती है।
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शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने का संकल्प
अंत में अभिजीत दीपके ने कहा कि विरोध और हमलों के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने युवाओं से संयम बनाए रखने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी टकराव को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा शुरू करना है। इसी दिशा में वे आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करते रहेंगे।










