CJP Hunger Strike : सोनम वांगचुक समर्थन में CJP का सामूहिक भूख हड़ताल ऐलान, आंदोलन तेज हुआ आज

सोनम वांगचुक के समर्थन में CJP ने सामूहिक भूख हड़ताल का ऐलान किया है, जिससे आंदोलन और तेज हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह कदम सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच चल रही बातचीत को किस दिशा में ले जाएगा और आगे क्या बड़ा फैसला होगा।

CJP Hunger Strike

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 15, 2026

CJP Hunger Strike : शिक्षा सुधार कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को समर्थन देने के लिए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 16 जुलाई को पूरे देश में सामूहिक भूख हड़ताल (Mass Hunger Strike) का आह्वान किया है। पार्टी ने आम जनता और छात्रों से एक दिन का सांकेतिक उपवास रखकर वांगचुक के आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाने की अपील की है। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य देश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कुव्यवस्था और NEET (UG) 2026 में हुई कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाना है। CJP का मानना है कि इस जनआंदोलन के जरिए वे सरकार का ध्यान न केवल छात्रों की जायज मांगों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं, बल्कि सोनम वांगचुक की गिरती स्वास्थ्य स्थिति पर भी संवेदनशीलता की अपेक्षा रखते हैं।

जंतर-मंतर पर वांगचुक का 18वां दिन, स्वास्थ्य पर गहराता संकट

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन उपवास आज अपने 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है। वांगचुक और CJP की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली के खिलाफ है। हालांकि राजनीतिक और सामाजिक जगत की कई हस्तियों ने उनसे उपवास समाप्त करने का आग्रह किया है, लेकिन वांगचुक अपनी मांगों पर अडिग हैं। अभिनेत्री श्रेया धनवंतरी जैसे समर्थकों ने भी उनके शांतिपूर्ण विरोध के तरीकों की सराहना करते हुए स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का निवेदन किया है। स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के अनुसार, वांगचुक का वजन 8.25 किलोग्राम तक कम हो गया है। उनका ब्लड शुगर लेवल लगातार 70 mg/dL से नीचे जा रहा है, और उन्हें अत्यधिक शारीरिक कमजोरी, चक्कर आने और पसलियां स्पष्ट दिखाई देने जैसे गंभीर लक्षणों का सामना करना पड़ रहा है।

परीक्षा सुधार के लिए CJP का पांच-सूत्रीय चार्टर

CJP ने जंतर-मंतर पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपना ‘परीक्षा सुधार के लिए 5-सूत्रीय चार्टर’ सार्वजनिक किया है। इस चार्टर के माध्यम से पार्टी ने भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही, पूर्ण पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने के लिए व्यापक संरचनात्मक परिवर्तनों की मांग रखी है। यह आंदोलन 20 जून से जारी है, जिसमें वांगचुक 28 जून को शामिल हुए थे। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि यह लड़ाई केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस पूरे सिस्टम के सुधार के लिए है जिसने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।

20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च और आर-पार की लड़ाई

कॉकरोच जनता पार्टी ने घोषणा की है कि 16 जुलाई की सामूहिक भूख हड़ताल के बाद, वे 20 जुलाई को एक शांतिपूर्ण ‘संसद मार्च’ का नेतृत्व करेंगे। CJP ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पद से इस्तीफा नहीं देते और शिक्षा तंत्र में व्यापक सुधार लागू नहीं किए जाते, तब तक यह जनसमर्थन और आंदोलन जारी रहेगा। वांगचुक की सेहत चिंताजनक होने के बावजूद, उनका और पार्टी का संकल्प है कि वे तब तक नहीं झुकेंगे जब तक बार-बार हो रही परीक्षा नाकामियों की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती। यह आंदोलन अब देश के युवाओं के भविष्य और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग को लेकर एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

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