CJP Guidelines: CJP की गाइडलाइन से बढ़ी हलचल, ‘चलो संसद’ मार्च से पहले खास अपील

सीजेपी ने 20 जुलाई को होने वाले 'चलो संसद' मार्च में शामिल होने वाले प्रदर्शनकारियों के लिए गाइडलाइन जारी की है।

CJP Guidelines

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 19, 2026

CJP Guidelines: जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में 20 जुलाई को नई दिल्ली में होने वाले ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है। संसद के मॉनसून सत्र के आगाज के साथ ही यह प्रदर्शन और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। इस मार्च को सफल बनाने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है, जिसमें प्रदर्शनकारियों को अनुशासन और शांति बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

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शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान

सीजेपी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यह मार्च सुबह 9 बजे जंतर-मंतर से शुरू होगा। प्रदर्शनकारियों से अपील की गई है कि वे पूरी तरह से अहिंसक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाएं। सीजेपी ने ‘क्या करें और क्या न करें’ (Do’s and Don’ts) की एक स्पष्ट सूची साझा की है।

क्या करें (Do’s)

प्रदर्शनकारी अपने साथ तिरंगा (राष्ट्रीय ध्वज) अवश्य लाएं।

संविधान की प्रति, महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और भगत सिंह की तस्वीरें साथ रखें।

नारे सिर्फ सकारात्मक होने चाहिए, जैसे ‘जय हिंद’, ‘भारत माता की जय’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘जय भीम’।

सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपने मोबाइल में हर गतिविधि को रिकॉर्ड करने की सलाह दी गई है।

अकेले आने के बजाय दोस्तों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों को साथ लाने का आग्रह किया गया है ताकि समर्थन का दायरा बढ़ सके।

क्या न करें

राष्ट्रीय ध्वज का किसी भी स्थिति में अपमान न हो, इसे जमीन पर न रखें।

किसी भी गलत गतिविधि को नजरअंदाज न करें और उस पर तुरंत आवाज उठाएं।

स्वास्थ्य के लिहाज से यह सुझाव दिया गया है कि प्रदर्शनकारी घर से भोजन करके आएं ताकि निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) जैसी समस्याओं से बचा जा सके।

जुलाई की भीषण गर्मी को देखते हुए प्रदर्शनकारियों से दुपट्टा और टोपी साथ रखने को कहा गया है।

जंतर-मंतर पर तनाव और सरकारी कार्रवाई

यह ‘चलो संसद’ मार्च पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन का ही एक हिस्सा है। प्रदर्शनकारी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत के संकेत नहीं मिले हैं।

मामला तब और अधिक तूल पकड़ गया जब 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती करा दिया। सीजेपी ने इस सरकारी कार्रवाई को 20 जुलाई के मार्च को विफल करने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। संगठन का मानना है कि सोनम वांगचुक को हटाए जाने से प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम होने के बजाय और अधिक बढ़ गया है।

बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस भी पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच, यह मार्च अब न केवल मांगों के समर्थन का माध्यम बन गया है, बल्कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच शक्ति प्रदर्शन का केंद्र भी बनता जा रहा है। आने वाला समय ही बताएगा कि क्या यह मार्च अपनी मांगों को मनवाने में सफल हो पाता है।

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