CJI Surya Kant Statement : सीजेआई सूर्यकांत का बड़ा बयान, अदालतों को अस्पतालों की तरह चौबीसों घंटे काम करने की जरूरत

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश की अदालतों में लंबित करोड़ों मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी विचार पेश करते हुए कहा है कि देश की न्याय व्यवस्था को अब अस्पतालों की तरह चौबीसों घंटे (24/7) काम करने की सख्त जरूरत है; जानिए इस महा-योजना के पीछे का पूरा कूटनीतिक सच।

CJI Surya Kant Statement

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 17, 2026

CJI Surya Kant Statement :  मध्य प्रदेश के जबलपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को न्यायपालिका को लेकर एक बेहद बड़ा और दूरगामी बयान दिया है। उन्होंने देश की न्यायिक व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि अब वह समय आ चुका है जब हमारी न्यायपालिका को एक ऐसी अत्याधुनिक प्रणाली विकसित करनी होगी, जिससे समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े आम आदमी को भी तुरंत और बिना किसी देरी के राहत मिल सके। सीजेआई सूर्यकांत ने एक बेहद सटीक उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी न्यायिक प्रणाली को ठीक उन अस्पतालों की तरह काम करने की जरूरत है, जो मरीजों की सेवा के लिए चौबीसों घंटे (24×7) खुले रहते हैं। अदालतें भी इसी तर्ज पर काम करें ताकि आम आदमी की पीड़ा, शिकायतों और उसकी न्याय के प्रति आकांक्षाओं का त्वरित समाधान किया जा सके।

डिजिटल प्लेटफॉर्म एकीकरण कार्यक्रम में शामिल हुए सीजेआई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा आयोजित एक विशेष और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अपना संबोधन दे रहे थे। इस खास कार्यक्रम का मुख्य विषय “फ्रेगमेंटेशन टू फ्यूजन, एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन” (खंडन से संलयन, संयुक्त डिजिटल प्लेटफॉर्म एकीकरण के माध्यम से न्याय को सशक्त बनाना) रखा गया था। इस गरिमामयी और महत्वपूर्ण अवसर पर सीजेआई ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा नव-विकसित किए गए एक बेहद आधुनिक और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का आधिकारिक रूप से शुभारंभ भी किया। इस प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य अदालती कामकाज को पूरी तरह से पेपरलेस और पारदर्शी बनाना है।

न्यायिक समय की बर्बादी रोकने का एकमात्र जरिया टेक्नोलॉजी

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए मुख्य न्यायाधीश ने देश में न्याय का दायरा व्यापक स्तर पर बढ़ाने और अदालती फैसलों में तेजी लाने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक मजबूत न्यायिक ढांचे के निर्माण का पुरजोर आह्वान किया। उन्होंने न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा, “भारतीय न्यायपालिका न केवल 1990 के दशक से चली आ रही तकनीकी प्रगति का सर्वोत्तम और कुशलता से उपयोग करने के लिए पूरी तरह वचनबद्ध है, बल्कि हम आम नागरिकों के कल्याण और फायदे के लिए नवीनतम एआई (AI) डिजाइनों व टूल्स का उपयोग करने पर भी अपना ध्यान मजबूती से केंद्रित कर रहे हैं।” सीजेआई ने बेहद साफ शब्दों में कहा कि वर्तमान समय में न्यायपालिका और वादियों के कीमती समय की बर्बादी को रोकने का एकमात्र और सबसे प्रभावी समाधान सिर्फ और सिर्फ आधुनिक टेक्नोलॉजी ही है।

कोरोना महामारी के मुश्किल दौर को किया याद, विपरीत परिस्थितियों में भी बंद नहीं हुए थे अदालत के दरवाजे

कोविड-19 वैश्विक महामारी के उस बेहद डरावने और मुश्किल दौर को याद करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने भारतीय अदालतों के जज्बे को सलाम किया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल के सबसे कठिन समय में भी अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाने के लिए भारतीय न्यायपालिका की वैश्विक स्तर पर सराहना की गई थी। उन्होंने गर्व से बताया, “भले ही पूरे देश में लॉकडाउन लगा था, लेकिन हमने अपने अदालतों के दरवाजे नागरिकों के लिए कभी बंद नहीं किए।” संकट के उस दौर में भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से ही अदालतों ने अति-जरूरी और तत्काल सुनवाई वाले मामलों की कार्यवाही को बिना रुके पूरी मुस्तैदी से संपन्न किया था।

पूरे देश में लागू होना चाहिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह सफल डिजिटल मॉडल: सीजेआई

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा तकनीकी क्षेत्र में किए गए इस सराहनीय कार्य की खुलकर प्रशंसा करते हुए सीजेआई ने एक बड़ा सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि जैसा कि देश के केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी अपनी राय दी है, इस बेहतरीन और सफल तकनीकी प्रणाली को केवल एक राज्य तक सीमित न रखकर पूरे देश के स्तर पर लागू करने की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने देश को यह भी महत्वपूर्ण जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस संबंध में एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जा चुका है। यह समिति वर्तमान में इस बात का गहराई से अध्ययन और शोध कर रही है कि देश भर की अदालतों में लंबित मामलों के त्वरित और समयबद्ध निपटारे के लिए न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिम्मेदारी से और प्रभावी उपयोग कैसे किया जा सकता है।