
NLSIU Convocation 2026 : बेंगलुरु में नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के दीक्षांत समारोह में 17 अक्टूबर 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्नातक विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि देश को उनसे काफी उम्मीदें हैं। उन्होंने कानूनी शिक्षा को केवल किताबों और अदालतों तक सीमित न मानते हुए समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम बताया। उनके अनुसार, कानून की पढ़ाई विद्यार्थियों को कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने और न्याय के मूल्यों को समझने के लिए तैयार करती है।
‘कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं’
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कानूनी पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। उन्होंने नए कानून स्नातकों से सही बात के पक्ष में खड़े होने और अन्याय के सामने आवाज उठाने का साहस रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि एक अच्छे वकील के लिए मजबूत तर्क प्रस्तुत करना जरूरी है, लेकिन दूसरों की बात ध्यान से सुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से उन लोगों की समस्याओं को समझना जरूरी है, जिनकी आवाज अक्सर समाज में अनसुनी रह जाती है।

सिद्धांतों से समझौता न करें युवा वकील
CJI ने युवा वकीलों को सलाह दी कि वे करियर में जल्दी सफलता हासिल करने या व्यक्तिगत सुविधा के लिए अपने सिद्धांतों को न छोड़ें। उन्होंने शॉर्टकट के बजाय ईमानदारी और नैतिकता के रास्ते पर चलने की बात कही। उनके अनुसार, कानूनी पेशे में व्यक्ति की पहचान केवल उसकी जानकारी और बहस करने की क्षमता से नहीं बनती, बल्कि उसके आचरण और मूल्यों से भी तय होती है। NLSIU में प्राप्त शिक्षा और प्रशिक्षण विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद कर सकते हैं।
मुकदमे लड़ने तक सीमित नहीं
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वकीलों की जिम्मेदारी अदालत में मुकदमे लड़ने और कानूनी दलीलें देने से कहीं आगे तक जाती है। उन्हें नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और आम लोगों की न्याय तक पहुंच आसान बनाने में योगदान देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का इस्तेमाल समाज के व्यापक हित में करने के लिए प्रेरित किया। उनके संदेश का प्रमुख उद्देश्य यह था कि कानूनी पेशे से जुड़े लोग निष्पक्षता, न्याय और सामाजिक जिम्मेदारी को अपने काम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं।

दिवंगत कानून स्नातक को श्रद्धांजलि
दीक्षांत समारोह के दौरान CJI सूर्यकांत ने NLSIU की एक दिवंगत कानून स्नातक को भी श्रद्धांजलि दी, जो समारोह में शामिल नहीं हो सकीं। उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक यात्रा में योगदान देने वाले अभिभावकों, शिक्षकों, फैकल्टी सदस्यों और विश्वविद्यालय कर्मचारियों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी विद्यार्थी की उपलब्धि के पीछे परिवार, शिक्षकों और संस्थान से जुड़े अनेक लोगों का सहयोग होता है। उनकी मेहनत विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने में अहम भूमिका निभाती है।
NLSIU की शिक्षा के साथ नैतिक जिम्मेदारी निभाने की अपील
CJI सूर्यकांत ने NLSIU की कठोर शैक्षणिक प्रक्रिया और कानूनी प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने नए स्नातकों को ज्ञान, साहस, विनम्रता और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उनके संबोधन ने यह स्पष्ट किया कि एक सफल कानूनी करियर का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धियां हासिल करना नहीं, बल्कि समाज में न्याय और विश्वास को मजबूत करना भी है। युवा वकीलों के लिए यही मूल्य उनके पेशेवर जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।











