CJI Statement: राजधानी दिल्ली में इंडी (INDIA) गठबंधन के विरोध मार्च और मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की मांग को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने एक बेहद स्पष्ट और दो टूक रुख अपनाया है। सीजेआई ने विपक्षी नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने में असमर्थता जताते हुए उन्हें औपचारिक और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने की सलाह दी है।
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मुलाकात के अनुरोध पर लिखित जवाब

मुख्य न्यायाधीश कार्यालय को विपक्षी दलों के नेताओं की ओर से एक मुलाकात का औपचारिक पत्र मिला था, जिसका संज्ञान लेते हुए सीजेआई ने उसका लिखित जवाब भेज दिया है। अपने इस जवाब में उन्होंने विपक्षी नेताओं से व्यक्तिगत रूप से मिलने में असमर्थ होने के कारणों से पूरी तरह अवगत करा दिया है।
विपक्ष की मांग थी कि चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े नए कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट इसमें तत्काल हस्तक्षेप करे, जिसके संबंध में वे ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश के इस स्पष्ट रुख से यह साफ हो गया है कि राजनीतिक मुद्दों या विरोध प्रदर्शनों के तहत सीधे चैंबर में मुलाकात करने के बजाय मामलों को उचित न्यायिक मंच के माध्यम से ही उठाया जाना चाहिए।
न्यायिक निष्पक्षता और अदालत के दरवाजे

न्यायिक स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर जोर देते हुए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत के दरवाजे हर एक नागरिक के लिए हमेशा खुले हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे कोई आम नागरिक हो या किसी निर्वाचित निकाय, संसद अथवा विधानसभा का कोई सम्मानित सदस्य, हर किसी को अदालत का रुख करने का पूरा अधिकार है।
सीजेआई ने कहा कि यदि किसी को भी अपनी बात रखनी है, तो उन्हें किसी ज्ञापन के जरिए नहीं, बल्कि उचित कानूनी प्रक्रिया और याचिका के माध्यम से अदालत आना चाहिए। न्यायपालिका सभी पक्षों की चिंताओं को सुनकर कानून के दायरे में जो भी उचित अधिकार या राहत बनती है, वह जरूर प्रदान करेगी।
ज्ञापन के बजाय याचिका दाखिल करने का संदेश
मुख्य न्यायाधीश के इस बयान से यह संदेश गया है कि चुनावी सुधारों, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) या अन्य नीतिगत मामलों में राहत केवल और केवल न्यायिक मंच पर औपचारिक याचिका दायर करके ही प्राप्त की जा सकती है।
विपक्षी दलों के नेता चुनाव प्रक्रिया को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में संज्ञान लेने की मांग कर रहे थे। अब सीजेआई के इस दो टूक संदेश के बाद यह साफ हो गया है कि शीर्ष अदालत राजनीतिक मुलाकातों के बजाय केवल स्थापित न्यायिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही मामलों की सुनवाई करेगी।
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