Chitrakoot Flood: चित्रकूट में बाढ़ से तबाही,16 गांव डूबे, 700 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने भारी तबाही मचाई है। मध्य प्रदेश की ओर 700 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया, जबकि उत्तर प्रदेश में भी 200 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया। कई इलाकों में पानी और कीचड़ ने घरों को तबाह कर दिया। अब राहत और नुकसान का असली आकलन शुरू होगा।

Chitrakoot Flood

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 31, 2026

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Chitrakoot Flood : उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। मंदाकिनी नदी का जलस्तर घटने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है, मगर बाढ़ अपने पीछे भारी तबाही छोड़ गई है। जिले के करीब 16 गांव प्रभावित हुए हैं और 700 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। कई घरों में करीब पांच फीट तक कीचड़ और मलबा जमा है।

डीएम और एसपी ने प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा

बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। दोनों अधिकारी तरौहां पहुंचे और मौके पर हालात का जायजा लिया। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य में जुटी टीमों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। प्रशासन की टीमें निचले और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं। लोगों से नदी तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की जा रही है।

घरों में जमा कीचड़ ने बढ़ाई लोगों की परेशानी

पानी उतरने के बाद अब प्रभावित परिवारों के सामने घरों की सफाई और नुकसान का संकट खड़ा हो गया है। कई मकानों के अंदर करीब पांच फीट तक कीचड़ और मलबा जमा है। लोग खुद पानी, गंदगी और मलबा निकालने में जुटे हैं। घरों में रखे फ्रिज, कूलर और अन्य सामान भी खराब हो गए हैं। सड़कों पर जगह-जगह कचरा जमा है, जबकि बिजली के टूटे खंभे भी दिखाई दे रहे हैं।

रामघाट पुल टूटा, तुलसीदास की मूर्ति को नुकसान

बाढ़ के तेज बहाव ने चित्रकूट के रामघाट क्षेत्र को भी काफी नुकसान पहुंचाया है। यहां बना पुल टूटकर मंदाकिनी नदी में जा गिरा। इसके अलावा तुलसीदास की मूर्ति भी बाढ़ की चपेट में आ गई। मूर्ति का कंधे के ऊपर का हिस्सा बह गया। पानी घटने के बाद सामने आई नुकसान की तस्वीरों ने स्थानीय लोगों और कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है।

हेलिकॉप्टर और SDRF ने चलाया बड़ा बचाव अभियान

बाढ़ के दौरान फंसे लोगों को निकालने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। दो हेलिकॉप्टर और एसडीआरएफ की टीमों की मदद से करीब 50 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। गोबरिया गांव में 12 लोग लगभग चार घंटे तक पीपल के पेड़ पर बैठे रहे। चारों तरफ पानी होने के कारण उनके लिए नीचे उतरना संभव नहीं था। रेस्क्यू टीम ने सभी को सुरक्षित बाहर निकाला।

बच्चों और परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया

एसडीआरएफ की टीमों ने बाढ़ में फंसे बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। कई परिवारों ने पानी बढ़ने पर घर छोड़कर छतों पर शरण ली थी। लगातार राहत एवं बचाव अभियान के कारण बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका। प्रशासन अब प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाने और स्थिति सामान्य करने में जुटा है।

पहली मंजिल तक पहुंचा था बाढ़ का पानी

चित्रकूट में लगातार बारिश और मध्य प्रदेश के बरगी बांध से पानी छोड़े जाने के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा था। नदी में करीब 30 फीट तक उफान आने की बात सामने आई। बाढ़ का पानी कई इलाकों में मकानों की पहली मंजिल तक पहुंच गया था। जान बचाने के लिए लोग घरों की छतों पर चले गए थे। अब पानी घटने पर लोग वापस लौट रहे हैं।

यमुना किनारे बसे गांवों में भी बढ़ी निगरानी

मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने के बाद यमुना नदी के किनारे बसे इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने तटीय गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। रामघाट और आसपास के घाटों पर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें जलस्तर पर लगातार नजर रख रही हैं। निचले इलाकों में दोबारा पानी बढ़ने की आशंका के चलते लोगों को सावधान किया गया है।

दुकानदारों को फिर सताने लगी बाढ़ की चिंता

पिछली बाढ़ से हुए नुकसान से दुकानदार अभी उबर भी नहीं पाए थे कि जलस्तर में फिर बढ़ोतरी ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। कई व्यापारी अपना सामान सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटे हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा, राहत-बचाव और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करना है। प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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