CJP Protest: चिराग पासवान की पहल पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, वीर शिरोमणि बाबा चौहरमल पर जारी होगा स्मारक डाक टिकट

लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पहल पर केंद्र सरकार ने पासवान समाज के आराध्य देव व महान लोकनायक वीर शिरोमणि बाबा चौहरमल के सम्मान में स्मारक डाक टिकट जारी करने का फैसला किया है। केंद्रीय संचार मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

CJP Protest

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जुलाई 21, 2026

CJP Protest: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री तथा केंद्रीय कैबिनेट के युवा नेता चिराग पासवान की एक और बड़ी राजनीतिक व सांस्कृतिक मुहिम रंग लाई है। केंद्र सरकार ने बिहार के महान लोकनायक, दलित समाज के स्वाभिमान और अदम्य साहस के प्रतीक वीर शिरोमणि बाबा चौहरमल के सम्मान में एक विशेष स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamp) जारी करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। केंद्रीय संचार मंत्रालय ने इस संबंध में चिराग पासवान द्वारा भेजे गए आधिकारिक प्रस्ताव को अपनी पूर्ण और औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। विभाग की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद अब बहुत जल्द देश की राजधानी और बिहार में एक भव्य राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम का आयोजन कर इस ऐतिहासिक डाक टिकट का विमोचन किया जाएगा, जिसे देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर ‘हनुमान’ ने जताई खुशी

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी स्वयं अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक पोस्ट के माध्यम से देश और प्रदेश की जनता के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व उन्होंने व्यक्तिगत रूप से केंद्रीय संचार राज्यमंत्री को एक विस्तृत पत्र लिखकर 14वीं शताब्दी के महान समाज सुधारक और योद्धा बाबा चौहरमल की स्मृति को राष्ट्रीय पटल पर सहेजने का विशेष अनुरोध किया था।

“मैं इस दूरदर्शी और ऐतिहासिक निर्णय के लिए देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संपूर्ण केंद्र सरकार का सहृदय आभार व्यक्त करता हूं। यह फैसला बाबा चौहरमल के अद्वितीय साहस, सामाजिक समरसता (Social Harmony) और उनकी प्रेरणादायी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च सम्मान दिलाने वाला है।” – चिराग पासवान, केंद्रीय मंत्री व लोजपा (आर) अध्यक्ष

इस बीच, केंद्रीय संचार राज्यमंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने चिराग पासवान को एक आधिकारिक पत्र भेजकर यह पुष्टि की है कि मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति ने उनके प्रस्ताव को पूरी तरह स्वीकार कर लिया है और विमोचन की प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

कौन थे सामाजिक समरसता के अग्रदूत बाबा चौहरमल?

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान पाने वाले वीर शिरोमणि बाबा चौहरमल को विशेष रूप से देश के शोषित, वंचित और पासवान समाज के आराध्य देव (Deity of Paswan Community), महान लोकनायक और एक अपराजेय वीर योद्धा के रूप में अत्यंत श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। ऐतिहासिक साक्ष्यों और लोक मान्यताओं के अनुसार, उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त जात-पात, छुआछूत, ऊंच-नीच और प्रशासनिक अन्याय के खिलाफ एक सशक्त क्रांति का शंखनाद किया था।

उन्होंने जीवन पर्यंत समानता और सामाजिक समरसता का दिव्य संदेश समाज के हर वर्ग को दिया। ऐतिहासिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका जन्म 1313 ईस्वी में चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर वर्तमान बिहार के पटना जिले के अंतर्गत आने वाले मोकामा क्षेत्र के शंकरवार टोला में हुआ था। उनके पिता का नाम बंदीमल और माता का नाम रघुमती था, जिन्होंने लोक कल्याण के लिए अपने पुत्र को राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिया था।

मोकामा टाल में उमड़ता है आस्था का महासैलाब

वीर शिरोमणि बाबा चौहरमल की पावन स्मृति और उनके प्रति गहरी जन-आस्था का सबसे बड़ा प्रमाण हर साल देखने को मिलता है, जब चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर बिहार के मोकामा टाल क्षेत्र में बाबा चौहरमल मेले (Baba Chouharmal Mela Mokama) का एक अत्यंत विशाल और भव्य आयोजन किया जाता है। इस ऐतिहासिक लोक महोत्सव में न केवल संपूर्ण बिहार, बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और देश के विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी बाबा के दर्शन के लिए मोकामा पहुंचते हैं।

इस पारंपरिक पूजा के दौरान श्रद्धालु और समाज के लोग बाबा की प्रतिमा पर गाय का शुद्ध दूध और बिहार का प्रसिद्ध व्यंजन ‘लिट्टी’ का महाप्रसाद अर्पित करते हैं और सामूहिक सुख-समृद्धि, सामाजिक न्याय तथा परिवार के कल्याण की कामना करते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा स्मारक डाक टिकट जारी करने का यह फैसला बाबा चौहरमल के करोड़ों अनुयायियों और दलित-पिछड़े समाज के स्वाभिमान को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान देगा।