China Warns Pakistan: ‘दोस्ती अपनी जगह, पैसा अपनी जगह’, चीन ने पाकिस्तान को दी बिजली-गैस काटने की धमकी

पाकिस्तान की बदहाली के बीच उसके 'सदाबहार दोस्त' चीन ने बड़ा झटका दिया है। चीनी ऊर्जा कंपनियों ने 220 मिलियन डॉलर का बकाया न चुकाने पर गैस और बिजली आपूर्ति ठप करने की धमकी दी है। क्या अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए पाकिस्तान चीन की शर्तें मानेगा या अंधेरे में डूबेगा?

China Warns Pakistan

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 2, 2026

China Warns Pakistan:  पाकिस्तान और चीन के बीच की तथाकथित ‘हिमालय से ऊंची’ दोस्ती में अब पैसों की खनक और तल्खी साफ सुनाई देने लगी है। कंगाली की कगार पर खड़े पाकिस्तान को उसके सबसे करीबी रणनीतिक साझेदार चीन ने कड़े लहजे में हड़काया है। यह पूरा विवाद लगभग 220 मिलियन डॉलर (करीब 2050 करोड़ रुपये) के बकाया बिजली और गैस बिलों से जुड़ा है। चीन ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि यूनाइटेड एनर्जी पाकिस्तान (UEP) का भुगतान तुरंत नहीं किया गया, तो पाकिस्तान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। बीजिंग ने सीधे तौर पर धमकी दी है कि इस देरी से न केवल अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा टूटेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले तमाम विदेशी निवेश भी ठप हो सकते हैं।

बीजिंग से आया ‘अर्जेंट नोट’: ऊर्जा आपूर्ति ठप होने का मंडराया खतरा

‘द न्यूज’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन में तैनात पाकिस्तानी राजदूत ने अपनी सरकार को एक अत्यंत गोपनीय और ‘अर्जेंट नोट’ भेजा है। इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि चीनी कंपनी को उसका पैसा नहीं मिला, तो वह अपना कामकाज पूरी तरह बंद कर सकती है। यूनाइटेड एनर्जी पाकिस्तान (UEP) वर्तमान में ‘सुई सदर्न गैस कंपनी’ (SSGC) को रोजाना 260-270 मिलियन क्यूबिक फीट (MMcfd) गैस की आपूर्ति कर रही है। फंड की भारी कमी के कारण स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि चीनी कंपनी को पिछले कुछ हफ्तों में अपने कई कर्मचारियों को नौकरी से निकालना पड़ा है। अगर यह सप्लाई रुकती है, तो पाकिस्तान में बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।

सरकारी विभागों की आपसी खींचतान में फंसा समाधान

इस विवाद को सुलझाने के लिए पाकिस्तान की ‘स्पेशल इन्वेस्टमेंट फेसिलिटेशन काउंसिल’ (SIFC) ने भी हस्तक्षेप किया है। काउंसिल ने सरकार को आगाह किया है कि विदेशी निवेशकों के बीच देश की साख बचाने के लिए इस बकाया राशि का तत्काल समाधान निकाला जाए। हालांकि, समस्या सरकारी विभागों की आपसी गुटबाजी में उलझी हुई है। सुई सदर्न गैस कंपनी (SSGC) का तर्क है कि वह भुगतान करना चाहती है, लेकिन उसके पास फंड नहीं है। कंपनी का दावा है कि ‘फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू’ (FBR) के पास उसके खुद के अरबों रुपये रिफंड के तौर पर अटके हैं। जब तक सरकार पुराने रिफंड जारी नहीं करती, वह चीनी कंपनी का बकाया चुकाने में असमर्थ है।

यूनाइटेड एनर्जी पाकिस्तान: चीन का तेल और गैस साम्राज्य

यूनाइटेड एनर्जी पाकिस्तान (UEP) पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र (E&P) में सक्रिय सबसे बड़ी विदेशी कंपनी है। साल 2011 में इस चीनी दिग्गज ने ब्रिटिश पेट्रोलियम (BP) की संपत्तियों का अधिग्रहण कर अपना आधार मजबूत किया था। 2012 में ‘चाइना डेवलपमेंट बैंक’ से मिली 5 बिलियन डॉलर की विशाल क्रेडिट लाइन के दम पर कंपनी ने सिंध प्रांत के बदिन, हैदराबाद, मटियारी और खैरपुर जैसे कई जिलों में अपना साम्राज्य फैलाया। साल 2019 तक UEP पाकिस्तान की 9वीं सबसे बड़ी निर्यातक कंपनी बन गई थी। इसके पास अरब सागर में चार ऑफशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक भी हैं, जो इसे पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपरिहार्य बनाते हैं।

विदेशी निवेश पर संकट और गहराता आर्थिक अंधकार

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के लिए यह स्थिति “आसमान से गिरे और खजूर में अटके” जैसी है। पाकिस्तान का ऊर्जा क्षेत्र पहले से ही नकदी की कमी और विनियामक दबावों से कराह रहा है। ऐसी नाजुक स्थिति में चीन जैसी महाशक्ति की नाराजगी पाकिस्तान के लिए आत्मघाती साबित हो सकती है। यदि चीन ने अपना हाथ खींच लिया, तो पाकिस्तान के पास निवेश का कोई दूसरा बड़ा स्रोत नहीं बचेगा। समय रहते बकाया न चुकाने पर न केवल बिजली और गैस का संकट गहराएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान एक ‘डिफॉल्टर’ राष्ट्र की छवि के और करीब पहुंच जाएगा, जिससे उबरना नामुमकिन होगा।

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