China-Taiwan Tension: मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी भीषण जंग के बीच अब एशिया के इस हिस्से से एक बेहद हैरान और डराने वाली खबर सामने आ रही है। चीन ने बिना कोई ठोस कारण या स्पष्टीकरण दिए, ताइवान के पास के एक बहुत बड़े हवाई क्षेत्र (Airspace) को आगामी 40 दिनों के लिए पूरी तरह से बंद (Reserve) कर दिया है।
‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने 27 अप्रैल से लेकर 6 जून तक अपने समुद्री और हवाई क्षेत्र को बंद रखने का एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है। चीन का यह आरक्षित क्षेत्र आकार में ताइवान के मुख्य द्वीप से भी काफी बड़ा है, जिसमें शंघाई के उत्तर और दक्षिण में स्थित अपतटीय हवाई क्षेत्र भी शामिल हैं।
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पीला सागर से पूर्वी चीन सागर तक पाबंदी

अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (FAA) के अनुसार, चीन द्वारा प्रतिबंधित किया गया यह विशाल क्षेत्र दक्षिण कोरिया की ओर स्थित ‘येलो सी’ (पीला सागर) से लेकर दक्षिण में जापान के पास ‘ईस्ट चाइना सी’ (पूर्वी चीन सागर) तक फैला हुआ है।
आमतौर पर अतीत में जब भी चीन इस तरह की पाबंदियां या चेतावनियां जारी करता था, तो उनका इस्तेमाल विमानन अधिकारियों और कमर्शियल उड़ानों को चीनी सैन्य अभ्यासों (Military Drills) के बारे में सचेत करने के लिए किया जाता था। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि वे अभ्यास अमूमन कुछ ही घंटों या ज्यादा से ज्यादा कुछ दिनों के लिए होते थे। ताइवान के आसपास चीनी मिलिट्री की उड़ानों में आए इस अचानक और अस्पष्ट ठहराव ने पूरी दुनिया की खुफिया एजेंसियों के सामने एक बड़ा रहस्य खड़ा कर दिया है।
क्या अमेरिका की मजबूरी का फायदा उठा रहा है चीन?
सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि बीजिंग ने इस इलाके में किसी भी तरह के सैन्य अभ्यास की आधिकारिक घोषणा तक नहीं की है। बिना किसी पूर्व सूचना के 40 दिनों जैसी लंबी अवधि के लिए इतने विशाल कमर्शियल एयरस्पेस को बंद कर देना किसी बड़े खतरे की तरफ इशारा करता है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह अप्रत्याशित कदम बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत ऐसे नाजुक वक्त में उठाया गया है, जब अमेरिका पूरी तरह से मिडिल ईस्ट और ईरान के साथ जारी युद्ध में उलझा हुआ है। अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक (हिंद-प्रशांत) क्षेत्र से अपने कई महत्वपूर्ण सैन्य साजो-सामान और संसाधनों को समेटकर मिडिल ईस्ट की तरफ शिफ्ट कर दिया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या चीन इस शून्य का फायदा उठाकर ताइवान पर कोई बड़ा एक्शन लेने की फिराक में है?










