China Population Crisis: जनसंख्या बढ़ाने की कोशिश, युवाओं को बिना गर्भनिरोधक संबंधों के लिए प्रेरित कर रहा चीन

चीन अपनी गिरती आबादी को बचाने के लिए अब युवाओं के निजी जीवन में दखल दे रहा है। 1 जनवरी 2026 से गर्भनिरोधकों पर 13% टैक्स लगाकर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि वह जन्मदर बढ़ाना चाहती है। क्या यह कदम चीन को फिर से युवा बना पाएगा या इससे स्वास्थ्य संकट खड़ा होगा?

China Population

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 18, 2026

China Population Crisis: वॉशिंगटन से सामने आई रिपोर्ट के अनुसार चीन अपने देश के युवाओं और युवतियों को बिना कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों के यौन संबंध बनाने के लिए अप्रत्यक्ष रूप से प्रेरित कर रहा है। चीनी सरकार नहीं चाहती कि कपल्स संबंध बनाते समय गर्भनिरोधक साधनों का इस्तेमाल करें। इसी उद्देश्य के तहत चीन ने कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों पर भारी टैक्स लगाने का फैसला किया है, ताकि इनका उपयोग स्वाभाविक रूप से कम हो सके।

गर्भनिरोधक उत्पादों पर अचानक क्यों लगाया गया टैक्स

रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने 1 जनवरी से कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियों और अन्य गर्भनिरोधक साधनों पर 13 प्रतिशत वैट लागू कर दिया है। इसके पीछे मुख्य वजह देश में तेजी से गिरती प्रजनन दर है। दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश अब गंभीर जनसंख्या संकट से जूझ रहा है और सरकार हर संभव तरीके से जन्मदर बढ़ाने की कोशिश कर रही है।‘द कन्वर्सेशन’ की रिपोर्ट के अनुसार चीन अब उन एशियाई देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां प्रजनन दर बेहद कम हो चुकी है। फिलहाल चीन की प्रजनन दर लगभग 1.0 बच्चा प्रति महिला है। सरकार का लक्ष्य इसे दोगुना करने का है। यही वजह है कि बीजिंग अब परंपरागत नीतियों से हटकर नए और सख्त कदम उठा रहा है।

चाइल्ड केयर और शादी सेवाओं को टैक्स से राहत

एक तरफ जहां गर्भनिरोधक उत्पादों पर टैक्स लगाया गया है, वहीं दूसरी ओर चाइल्ड केयर और मैट्रिमोनियल सेवाओं को टैक्स फ्री रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे शादी और बच्चों के पालन-पोषण को प्रोत्साहन मिलेगा। यह नीति स्पष्ट रूप से जनसंख्या बढ़ाने के उद्देश्य को दर्शाती है।चीन सरकार ने पिछले वर्ष राष्ट्रीय चाइल्ड केयर कार्यक्रम के लिए 90 अरब युआन का बजट आवंटित किया था। इसके तहत तीन साल या उससे कम उम्र के प्रत्येक बच्चे पर परिवारों को लगभग 3,600 युआन की एकमुश्त सहायता दी जाती है। सरकार उम्मीद कर रही है कि आर्थिक प्रोत्साहन से लोग अधिक बच्चे पैदा करने के लिए प्रेरित होंगे।

टैक्स के बाद कंडोम और गोलियों की कीमत

नए टैक्स लागू होने के बाद चीन में एक पैकेट कंडोम की कीमत करीब 50 युआन हो गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 630 रुपये बैठती है। वहीं एक महीने की गर्भनिरोधक गोलियों की कीमत औसतन 130 युआन यानी करीब 1150 रुपये तक पहुंच गई है। कीमतें बढ़ने से इनके उपयोग में कमी आने की उम्मीद की जा रही है।कई दशकों तक चीन में लागू रही एक-बच्चा नीति ने प्रजनन दर को तेजी से नीचे गिराया। 1960 के दशक में जहां प्रजनन दर 7.0 से अधिक थी, वहीं 2015 तक यह घटकर 1.5 रह गई। इसके बाद सरकार ने नीति बदली और पहले दो-बच्चा, फिर 2021 में तीन-बच्चा नीति लागू की।

नीतियां बदलीं, लेकिन जन्मदर नहीं बढ़ी

सरकार को उम्मीद थी कि दो-बच्चा और तीन-बच्चा नीति से देश में बेबी बूम आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 2021 में प्रजनन दर 1.2 रही और 2024 में घटकर 1.0 तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक बदलाव, महंगाई और जीवनशैली के कारण युवा कपल्स बच्चे पैदा करने से बच रहे हैं।गर्भनिरोधक साधनों पर टैक्स लगाना भले ही प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा हो, लेकिन यह साफ संकेत देता है कि चीन अपनी जनसंख्या नीति को लेकर कितना गंभीर है। अब देखना यह होगा कि यह रणनीति जन्मदर बढ़ाने में कितनी कारगर साबित होती है।