Hormuz Crisis: मिडिल ईस्ट में महायुद्ध के बीच चीन-पाकिस्तान का ‘शांति दांव’, हॉर्मुज खोलने के लिए पेश किया 5-सूत्रीय प्लान!

मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ठप पड़े वैश्विक व्यापार को बहाल करने के लिए चीन और पाकिस्तान ने हाथ मिलाया है। बीजिंग में पेश किए गए 5-सूत्रीय प्लान में तत्काल युद्धविराम और जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की मांग की गई है। क्या ड्रैगन का यह कूटनीतिक दांव युद्ध की दिशा बदल देगा?

Hormuz Crisis

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 2, 2026

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Hormuz Crisis: बीजिंग से आई ताजा खबरों के अनुसार, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz), जो दुनिया के तेल व्यापार की जीवनरेखा मानी जाती है, वहां नौवहन बाधित होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन टूटने की वजह से विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। इस संवेदनशील मोड़ पर जहां अमेरिका ने अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लिया है, वहीं चीन ने अब एक सक्रिय मध्यस्थ की भूमिका निभाने के संकेत दिए हैं।

चीन का कूटनीतिक हस्तक्षेप: शांति और स्थिरता की अपील

चीनी विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता बहाली पर जोर दिया है। प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में मीडिया से बात करते हुए कहा कि चीन इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों के साथ निरंतर संपर्क और तालमेल बनाए हुए है। चीन का मानना है कि इस जलमार्ग में शांति की बहाली न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा इच्छा भी है। बीजिंग ने आह्वान किया है कि सभी देशों को मिलकर इस दिशा में काम करना चाहिए ताकि वैश्विक व्यापार को और अधिक नुकसान न पहुंचे।

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर चीन का कड़ा प्रहार

प्रवक्ता माओ निंग ने मौजूदा संकट के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही में जो रुकावटें आई हैं, उसकी असली वजह ईरान के खिलाफ की गई “गैर-कानूनी सैन्य कार्रवाई” है। चीन के अनुसार, दुश्मनी और सैन्य टकराव कभी भी समस्या का स्थाई समाधान नहीं हो सकते। चीन ने चेतावनी दी है कि सैन्य तरीकों से संघर्ष को बढ़ाना किसी भी देश के हित में नहीं है और इसका खामियाजा पूरी दुनिया को ऊर्जा की किल्लत और आर्थिक मंदी के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

चीन-पाकिस्तान का 5-सूत्रीय शांति प्रस्ताव

इस संकट के समाधान के लिए चीन और पाकिस्तान ने एक साझा मोर्चा बनाया है। दोनों देश इस सप्ताह एक महत्वपूर्ण 5-सूत्रीय प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य जल्द से जल्द शांति वार्ता शुरू करना और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षा की अंतरराष्ट्रीय गारंटी प्रदान करना है। चीन इस प्रस्ताव के जरिए खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में पेश कर रहा है, जो पश्चिमी देशों द्वारा छोड़े गए कूटनीतिक शून्य को भरने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका का पल्ला झाड़ना: डोनाल्ड ट्रंप का विवादित बयान

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला रुख अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा करना अब अमेरिका की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का इससे कोई सीधा लेना-देना नहीं है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी कड़ी आलोचना हो रही है। अमेरिका के इस रुख ने उन देशों को चिंता में डाल दिया है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से खाड़ी देशों के तेल पर निर्भर हैं। अब सबकी निगाहें चीन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस तनाव को कम करने में कितना सफल हो पाता है।

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