China Coup Rumors: चीन में तख्तापलट की आहट? बीजिंग में बढ़ी सैन्य हलचल और हाई अलर्ट जारी

चीन के दिल बीजिंग में 'मिलिट्री' हलचल: क्या राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ कोई बड़ी साजिश रची गई है? जनरल झांग यूक्सिया और लियू झेंली जैसे दिग्गजों की अचानक गिरफ्तारी और बीजिंग की सड़कों पर तैनात काले कपड़ों वाले सुरक्षाकर्मियों ने दुनिया भर में तख्तापलट की अटकलों को तेज कर दिया है। जानिए क्या है सच।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 30, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

China Coup Rumors: चीन की सत्ता के गलियारों और राजधानी बीजिंग के बाहरी इलाकों में बीते कुछ दिनों से देखी जा रही असामान्य सैन्य हलचल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के इनपुट और चीनी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे अपुष्ट वीडियो के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि चीन में सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व रूप से कड़ा कर दिया गया है। अचानक बढ़ी इस सैन्य सक्रियता ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के भीतर और देश के सैन्य नेतृत्व के बीच किसी बड़े अंदरूनी मतभेद या संभावित तख्तापलट की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि, बीजिंग ने आधिकारिक तौर पर इस पर चुप्पी साध रखी है।

हाई अलर्ट पर पीएलए: ‘फर्स्ट-लेवल कॉम्बैट रेडीनेस’ के क्या हैं मायने?

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ($PLA$) की कई महत्वपूर्ण यूनिट्स को ‘फर्स्ट-लेवल कॉम्बैट रेडीनेस’ पर रखा गया है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह स्थिति तब लागू की जाती है जब देश को किसी बाहरी हमले का खतरा हो या फिर आंतरिक रूप से कोई बड़ा सुरक्षा संकट पैदा हो गया हो। राजधानी के आसपास सेना की ऐसी तैनाती सामान्य नहीं मानी जा रही है। चीनी प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण न आने के कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि यह राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सत्ता के विरुद्ध सेना के किसी गुट का असंतोष भी हो सकता है।

तियानजिन और वुकिंग में सैन्य काफिले: सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो

चीन के सख्त डिजिटल सेंसरशिप के बावजूद 26 जनवरी की तारीख वाले कुछ वीडियो वीचैट और वीबो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर लीक हुए हैं। इन वीडियो में भारी सैन्य वाहनों और बख्तरबंद काफिलों को तियानजिन के वुकिंग जिले से गुजरते हुए देखा जा सकता है, जो बीजिंग से मात्र 40-50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हालांकि इन वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन जिस तरह से संवेदनशील इलाकों में ‘पीपुल्स आर्म्ड पुलिस’ और एलिट ‘तेजिंग’ दस्तों की तैनाती बढ़ाई गई है, उसने अफवाहों के बाजार को गर्म कर दिया है। मेट्रो सेवाओं के आंशिक ठहराव और सैन्य परिसरों की सीलबंदी की खबरें भी चिंता बढ़ा रही हैं।

पीएलए के भीतर शुद्धिकरण अभियान: शीर्ष अधिकारियों पर गिरी गाज

इस पूरे घटनाक्रम की एक बड़ी वजह चीनी सेना के भीतर चल रहा ‘क्लीनअप’ या शुद्धिकरण अभियान माना जा रहा है। 24 जनवरी को स्वयं चीनी रक्षा मंत्रालय ने स्वीकार किया था कि सेना के कई शीर्ष स्तर के अधिकारियों के खिलाफ गंभीर जांच चल रही है। भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के नाम पर की जा रही इस कार्रवाई को कई विश्लेषक शी जिनपिंग द्वारा अपने विरोधियों को रास्ते से हटाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। सेना के भीतर बढ़ती जांच और वरिष्ठ अधिकारियों की आवाजाही पर लगी रोक ने पीएलए के विभिन्न गुटों के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।

सत्ता के उत्तराधिकार और गुटबाजी का संकट: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

भारतीय और वैश्विक खुफिया एजेंसियां इस स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बीजिंग के चारों ओर बढ़ती सुरक्षा घेरेबंदी सेना के भीतर पनप रही गुटबाजी का परिणाम हो सकती है। शी जिनपिंग द्वारा सत्ता के केंद्रीकरण और उत्तराधिकार को लेकर बरती जा रही गोपनीयता ने कम्युनिस्ट पार्टी के पुराने नेताओं और सेना के एक वर्ग को असहज कर दिया है। फिलहाल, भले ही चीन में खुले संघर्ष या तख्तापलट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन बीजिंग की खामोशी और अभूतपूर्व सैन्य सतर्कता किसी बड़ी राजनीतिक उठापटक की ओर स्पष्ट इशारा कर रही है।

Read More: IND vs NZ T20: तिरुवनंतपुरम मैच से पहले पद्मनाभस्वामी मंदिर पहुँची टीम इंडिया, जीत के लिए मांगा आशीर्वाद

2