चीन ने 6G रेस में बढ़ाई रफ्तार, 6GHz बैंड ट्रायल को मिली मंजूरी

रोबोट और एआई के बाद अब चीन 6G की रेस में सबसे आगे निकलने की तैयारी में है। ऐसा हम इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चीन के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर ने एक अहम कदम उठाया है। चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 6G के मोबाइल संचार सिस्टम के लिए टेस्ट फ्रीक्वेंसी के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। MIIT के अनुसार, उसने IMT-2030 (6G) प्रमोशन ग्रुप को 6GHz बैंड के लिए ट्रायल फ्रीक्वेंसी इस्तेमाल करने का परमिट दे दिया है। इससे चीन के चुनिंदा इलाकों में तकनीकी ट्रायल किए जा सकेंगे। इस मंजूरी का मकसद

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Published On :

मई 11, 2026

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रोबोट और एआई के बाद अब चीन 6G की रेस में सबसे आगे निकलने की तैयारी में है। ऐसा हम इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि चीन के टेलीकम्युनिकेशन सेक्टर ने एक अहम कदम उठाया है। चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 6G के मोबाइल संचार सिस्टम के लिए टेस्ट फ्रीक्वेंसी के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। MIIT के अनुसार, उसने IMT-2030 (6G) प्रमोशन ग्रुप को 6GHz बैंड के लिए ट्रायल फ्रीक्वेंसी इस्तेमाल करने का परमिट दे दिया है। इससे चीन के चुनिंदा इलाकों में तकनीकी ट्रायल किए जा सकेंगे। इस मंजूरी का मकसद चीन में 6G टेक्नोलॉजी पर रिसर्च और औद्योगिक लेवल पर उसके इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।

6G डेवलपमेंट को मिलेगा बढ़ावा
Xinhua न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह टेस्टिंग उन खास कामों पर आधारित होगी, जिन्हें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने 6G नेटवर्क के लिए जरूरी माना है। इनमें बहुत हाई डेटा स्पीड, बहुत कम लेटेंसी (देरी), बड़े पैमाने पर कनेक्टिविटी और इंटीग्रेटेड सेंसिंग शामिल हैं। इस फेज में डेवलपर्स तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए R&D (रिसर्च और डेवलपमेंट) और वेरिफिकेशन टेस्टिंग करेंगे। MIIT ने एक बयान में कहा कि इन टेस्ट फ्रीक्वेंसी को मिली मंजूरी से चीन में 6G के हाई क्वालिटी वाले डेवलपमेंट को बढ़ावा मिलेगा।

तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिश
यह टेस्टिंग उन खास कामों पर आधारित होगी, जिन्हें इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) ने 6G नेटवर्क के लिए जरूरी माना है। चीन IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप के जरिए 6G रिसर्च को तेजी से आगे बढ़ाने में लगा हुआ है। IMT-2030 प्रमोशन ग्रुप एक खास इंडस्ट्री प्लेटफॉर्म है, जिसमें बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर, इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियां, शिक्षण संस्थान और रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हैं। ये नए ट्रायल लाइसेंस चीन द्वारा पहले 5G लॉन्च करने और अभी चल रहे 5G एडवांस्ड डिप्लॉयमेंट के बाद एक अहम पड़ाव हैं।

6G का मतलब सिर्फ हाई स्पीड इंटरनेट नहीं- ज्योतिरादित्य सिंधिया
भारत की बात करें तो मार्च में टेलीकॉम मानकीकरण पर एक इंटरनेशनल वर्कशॉप में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि 6G सिर्फ तेज स्पीड और कम लेटेंसी तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इमर्सिव टेक्नोलॉजी और रियल-टाइम कनेक्टिविटी से पावर्ड "इंटेलिजेंट इंटरनेट ऑफ एवरीथिंग" को संभव बनाएगा

उनका कहना था कि 6G का मतलब सिर्फ स्पीड और लेटेंसी में जबरदस्त बढ़ोतरी करना ही नहीं है। यह इंटेलिजेंस, इमर्सिवनेस और असीमित संभावनाओं की दिशा में एक बड़ा बदलाव है।

भारत में किस बात का इंतजार
मंत्री ने कहा कि भारत 6G के विकास में खुद को सबसे आगे रखने के लिए एक्टिव होकर काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि भारत 6G IPR में सबसे आगे है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि 6G स्पेक्ट्रम के आवंटन का फैसला ITU और 3GPP करेंगे। यह फैसला अभी बाकी है और मानकीकरण की प्रोसेस पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।

 

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