Chhattisgarh News: सर्पदंश मुआवजा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, बिलासपुर में कई लोगों पर शिकंजा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें डॉक्टर, वकील और आवेदकों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये का सरकारी धन निकाला गया। आखिर कैसे मौतों को सर्पदंश दिखाकर यह पूरा खेल खेला गया, जानिए पूरी जांच की कहानी।

सर्पदंश मुआवजा योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जून 20, 2026

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश मुआवजा योजना के तहत हुए कथित घोटाले का बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में यह पता चला है कि सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए कई मामलों में मौत के वास्तविक कारणों को छिपाकर उन्हें सांप के काटने से हुई मौत के रूप में दर्शाया गया। इस मामले में पुलिस ने अब तक 14 अलग-अलग प्रकरणों में एफआईआर दर्ज कर कई लोगों को आरोपी बनाया है।

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अलग-अलग थानों में दर्ज हुए मामले

पुलिस जांच के दौरान कुल 17 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई थी, जिनमें से 14 मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार सरकंडा थाना क्षेत्र में पांच, कोनी में तीन, सिविल लाइन में तीन, तोरवा में दो तथा सिटी कोतवाली में एक मामला दर्ज किया गया है। शेष मामलों की जांच अभी जारी है और आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।

मौत की वजह बदली, मुआवजा हासिल किया

जांच में यह तथ्य सामने आया कि कई मृतकों की मौत बीमारी, जहरीले पदार्थ के सेवन या अन्य कारणों से हुई थी। हालांकि सरकारी मुआवजा प्राप्त करने के उद्देश्य से रिकॉर्ड में बदलाव कर मौत का कारण सर्पदंश बताया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में फर्जी मेडिकल दस्तावेज और अन्य प्रमाण तैयार किए गए, जिनके आधार पर मुआवजा स्वीकृत कराया गया।

संगठित नेटवर्क की भूमिका पर संदेह

पुलिस को आशंका है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित नेटवर्क के जरिए अंजाम दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ डॉक्टरों, वकीलों, आवेदकों और मृतकों के परिजनों की मिलीभगत से फर्जी दावे तैयार किए गए। इन दस्तावेजों के माध्यम से शासन से लाखों रुपये की राशि प्राप्त की गई।

कई परिवारों को नहीं थी जानकारी

अधिकारियों ने बताया कि कुछ मामलों में मृतकों के परिजनों को इस बात की जानकारी तक नहीं थी कि उनके नाम पर सर्पदंश मुआवजा स्वीकृत कराया गया है। जांच के दौरान कई दस्तावेजों में काट-छांट और संशोधन भी पाए गए हैं। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि पूरे मामले को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया।

लाखों रुपये की अनियमितता उजागर

अब तक की जांच में 60 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय गड़बड़ी सामने आ चुकी है। वहीं कुछ जनप्रतिनिधियों का दावा है कि यह राशि 70 लाख रुपये से भी ज्यादा हो सकती है। पुलिस और प्रशासन वित्तीय लेन-देन, आवेदन पत्रों और संबंधित रिकॉर्ड की गहन जांच कर रहे हैं।

विधानसभा में उठे सवाल के बाद शुरू हुई पड़ताल

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में इस विषय को उठाया। उन्होंने सवाल किया था कि जशपुर जैसे सर्पदंश प्रभावित जिले की तुलना में बिलासपुर में अधिक सर्पदंश मौतों के मामले क्यों दर्ज हो रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की, जिसमें फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं।

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आगे और बड़े खुलासों की संभावना

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला अभी शुरुआती चरण में है। जनप्रतिनिधियों का दावा है कि गहन जांच होने पर 100 से अधिक फर्जी मुआवजा मामलों का खुलासा हो सकता है। पुलिस का कहना है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और आने वाले दिनों में नए आरोपियों के नाम सामने आने के साथ-साथ और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।