Chhattisgarh Liquor Scam: चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से मिली जमानत, ED की गिरफ्तारी को दी थी चुनौती

छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित शराब घोटाले में क्या अब जांच की दिशा बदलेगी? करीब 6 महीने तक जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद, पूर्व सीएम के करीबी चैतन्य बघेल को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ईडी की सख्ती के बीच कोर्ट का यह फैसला राज्य की सियासत में क्या नया मोड़ लाएगा?

Chhattisgarh Liquor Scam

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 2, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

Chhattisgarh Liquor Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। इस मामले में उनकी जमानत याचिका पर बहस पहले ही पूरी हो चुकी थी। कोर्ट ने बहस पूरी होने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज जमानत आदेश जारी किया।

Chhattisgarh Liquor Scam: चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी और जेल में रहना

चैतन्य बघेल को शराब घोटाला मामले में 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में बंद रखा गया था। इस दौरान उन्होंने अदालत में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी और राहत की मांग की। चैतन्य की ओर से यह तर्क दिया गया कि उनके खिलाफ लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जमानत दी जानी चाहिए।

Chhattisgarh Liquor Scam: ईडी का पक्ष और आरोपों की व्याख्या

वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपने पक्ष में विस्तार से तर्क पेश किया। ED ने अदालत को बताया कि चैतन्य बघेल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं और जांच के दौरान उनकी गिरफ्तारी आवश्यक थी। एजेंसी ने अदालत को समझाया कि आरोपी के खिलाफ सबूत और दस्तावेज़ पर्याप्त हैं।

चैतन्य के पक्ष में वकील हर्षवर्धन परगनिहा

चैतन्य बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने अदालत में उनके पक्ष में दलीलें पेश कीं। उन्होंने अदालत को बताया कि चैतन्य के खिलाफ आरोपों के बावजूद जमानत मिलनी चाहिए, क्योंकि गिरफ्तारी के बाद भी वह जांच में सहयोग कर रहे हैं और कोई सबूत नष्ट करने का खतरा नहीं है।

सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की बेंच में

इस मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने की। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद चैतन्य बघेल की जमानत मंजूर की। जमानत आदेश में कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी द्वारा किसी भी तरह की बाधा डालने की कोशिश नहीं की जा सकती।

शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

यह मामला छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले से जुड़ा हुआ है, जिसमें बड़ी मात्रा में सरकारी धन के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगे हैं। चैतन्य बघेल पर आरोप है कि उन्होंने इस घोटाले से जुड़े लेन-देन में अपनी भूमिका निभाई। मामले में कई अन्य आरोपियों के खिलाफ भी जांच चल रही है।

जमानत मिलने के बाद संभावित कानूनी असर

चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद अब वह बाहर रहकर अपने खिलाफ चल रही जांच में सहयोग कर सकेंगे। हालांकि, प्रवर्तन निदेशालय मामले की जांच जारी रखेगा और आवश्यक होने पर अतिरिक्त तलब भी जारी कर सकता है। कानूनी जानकारों के अनुसार, जमानत मिलने के बावजूद मामले का अंतिम फैसला कोर्ट द्वारा जांच और सबूतों के आधार पर ही किया जाएगा।

राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर असर

चैतन्य बघेल की जमानत से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। यह मामला पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के परिवार से जुड़ा होने के कारण भी विशेष ध्यान आकर्षित कर रहा है। स्थानीय मीडिया और राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जमानत से जांच प्रक्रिया में कुछ सुविधा तो होगी, लेकिन मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोपों के चलते कानूनी लड़ाई जारी रहेगी।

Read More: चीन-पाक की नई साजिश? पाक के इस हिस्से में चीनी फौज, भारत के लिए बजा खतरे का अलार्म

2