छत्तीसगढ़ में अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने वन विभाग दे रहा विधिक साक्षरता प्रशिक्षण

रायपुर. राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई मामलों में अपराधी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वनकर्मियों को कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी न होने के कारण अपराधियों के विरुद्ध मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता, जिससे वे आसानी से छूट जाते हैं।  विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसी स्थिति से बचने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार वन विभाग के कर्मचारियों

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Published On :

जनवरी 3, 2026

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रायपुर.

राज्य के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए वन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। कई मामलों में अपराधी पकड़े भी जाते हैं, लेकिन कभी-कभी वनकर्मियों को कानूनी प्रावधानों की पूरी जानकारी न होने के कारण अपराधियों के विरुद्ध मजबूत प्रकरण तैयार नहीं हो पाता, जिससे वे आसानी से छूट जाते हैं। 

विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम
ऐसी स्थिति से बचने और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वन मंत्री श्री केदार कश्यप के नेतृत्व में तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पाण्डेय के निर्देशानुसार वन विभाग के कर्मचारियों के लिए विधिक साक्षरता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दिसंबर माह में वनमण्डल कार्यालय दुर्ग के सभागार में “प्रोटेक्ट टुडे एंड सिक्योर टुमारो” परियोजना के अंतर्गत एक दिवसीय विधिक साक्षरता कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें जिला न्यायालय दुर्ग के काउंसलर श्री चंद्राकर ने मुख्य वक्ता के रूप में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी जानकारी दी।

वन एवं वन्यजीव अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य वनकर्मियों को वन कानूनों, नियमों और धाराओं की स्पष्ट जानकारी देना है, ताकि प्रकरणों को मजबूत बनाया जा सके और अपराधियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सके। इसके लिए समय-समय पर संशोधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी कार्यशालाओं के माध्यम से दी जा रही है।

आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं की दी गई जानकारी
कार्यक्रम के दौरान भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रमुख प्रावधानों पर विशेष रूप से चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा आरक्षित और संरक्षित वनों से संबंधित कानूनी धाराओं तथा विभागीय कार्रवाई की प्रक्रियाओं को सरल भाषा में समझाया गया। साथ ही राजस्व क्षेत्रों में होने वाले वन अपराधों की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों पर भी जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के एक विशेष सत्र में नालसा के विशेषज्ञों ने अदालती मामलों के प्रबंधन से संबंधित “क्या करें और क्या न करें” पर व्यावहारिक सुझाव दिए, जिससे वनकर्मी विधिक प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन कर सकें। इस अवसर पर वन परिक्षेत्र अधिकारी दुर्ग एवं धमधा सहित वनमण्डल के समस्त कार्यपालिक और क्षेत्रीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्हें वन्यजीव और वन संपदा की सुरक्षा हेतु विधिक रूप से सजग रहने के लिए प्रशिक्षित किया गया।

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