Chemmani Mass Grave Jaffna : श्रीलंका के जाफना स्थित चेम्मनी इलाके से आ रही खबरों ने एक बार फिर दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक कथित सामूहिक कब्र की खुदाई के दौरान नर कंकालों के निकलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, खुदाई के तीसरे चरण तक अब तक कुल 249 कंकाल बरामद किए जा चुके हैं। यह स्थान दशकों पहले हुए भीषण गृहयुद्ध की गवाही दे रहा है, जहाँ सैकड़ों लोगों को एक साथ दफन कर दिया गया था। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी विशेषज्ञों की मौजूदगी में चल रही इस खुदाई ने श्रीलंका के अतीत के कई अनसुलझे और दर्दनाक पन्ने खोल दिए हैं।
न्यायिक आदेश के बाद खुदाई में आई तेजी
चेम्मनी में इस सामूहिक कब्रगाह की खुदाई का कार्य पिछले सात महीनों से अधर में लटका हुआ था। इसका मुख्य कारण श्रीलंका में चल रही पैसों की भारी किल्लत थी, जिसके चलते संसाधन जुटाना मुश्किल हो गया था। हालांकि, पिछले हफ्ते श्रीलंका की एक स्थानीय अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खुदाई को दोबारा शुरू करने का सख्त आदेश दिया। अदालत के दखल के बाद प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हुआ और खुदाई के तीसरे चरण को युद्धस्तर पर शुरू किया गया। न्यायिक निगरानी में चल रही इस प्रक्रिया का उद्देश्य उन गुमनाम लोगों की पहचान करना और सच्चाई को दुनिया के सामने लाना है।
तीसरे चरण में मिले नए कंकाल और ऐतिहासिक अवशेष
मानवाधिकार वकील रनीथा ज्ञानराजा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार तक हुई तीसरे चरण की खुदाई में 9 और नए नर कंकाल जमीन के नीचे से निकाले गए हैं। सिर्फ हड्डियाँ ही नहीं, बल्कि जमीन के भीतर से कुछ पुराने सिक्के और आभूषण का एक टुकड़ा भी बरामद हुआ है। ये अवशेष उस समय की जीवनशैली और घटनाक्रम को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। इससे पहले, खुदाई का दूसरा चरण लगभग 45 दिनों तक चला था, जो बेहद व्यापक था। उस दौरान खुदाई दल ने जमीन के सीने को चीरकर 240 कंकालों को बाहर निकाला था, जिसने इस कब्रगाह की विशालता को स्पष्ट कर दिया था।
लिट्टे संघर्ष और 1990 के दशक का काला इतिहास
चेम्मनी की यह कब्रगाह कोई नई खोज नहीं है, बल्कि इसका इतिहास साल 1990 के दशक के उस खूनी संघर्ष से जुड़ा है, जब श्रीलंका की सरकार और लिब्रेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के बीच युद्ध अपने चरम पर था। जाफना और आसपास के इलाकों में हुए भारी संघर्ष के दौरान हजारों लोग लापता हो गए थे। माना जाता है कि उस दौर में मारे गए लोगों को सामूहिक रूप से यहाँ दफनाया गया था। यह स्थान पहली बार तब चर्चा में आया था जब 1998 में यहाँ से 15 नर कंकाल मिले थे, लेकिन उस समय मामले की इतनी गहराई से जाँच नहीं हो सकी थी जितनी अब हो रही है।
विकास कार्य के दौरान हुआ इस खौफनाक सच का खुलासा
वर्तमान में चल रही इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत पिछले साल 13 फरवरी 2025 को हुई थी। उस दिन चेम्मनी में सामान्य विकास और निर्माण कार्य चल रहा था, तभी मजदूरों को अचानक जमीन के नीचे मानव अवशेष दिखाई दिए। देखते ही देखते वहाँ कंकालों का ढेर लग गया, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। इस घटना के ठीक एक सप्ताह बाद, अदालत ने संज्ञान लेते हुए पूरे क्षेत्र के न्यायिक परीक्षण और खुदाई का आदेश जारी किया। 15 मई को पहले चरण की आधिकारिक खुदाई शुरू हुई, जो अब अपने तीसरे और सबसे निर्णायक दौर में पहुँच चुकी है।
मानवाधिकार और न्याय की उम्मीद
इस सामूहिक कब्र से निकल रहे अवशेष केवल हड्डियाँ नहीं हैं, बल्कि उन परिवारों की उम्मीदें भी हैं जिनके अपने वर्षों पहले लापता हो गए थे। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इन कंकालों का डीएनए परीक्षण और वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि मरने वाले कौन थे और उनकी मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई थी। श्रीलंका के लिए यह खुदाई केवल एक पुरातात्विक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सुलह और जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम है। जैसे-जैसे खुदाई आगे बढ़ रही है, दुनिया की नजरें श्रीलंका की अदालत और सरकार पर टिकी हैं कि वे इस ऐतिहासिक त्रासदी को क्या न्याय प्रदान करते हैं।










