Chandrashekhar Azad NBW: नगीना सांसद के खिलाफ वारंट जारी, कोर्ट ने संपत्ति जब्ती का आदेश दिया

चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। गाजियाबाद की MP-MLA कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। मामला साहिबाबाद थाने में दर्ज एक केस से जुड़ा है। अदालत ने उनकी संपत्ति जब्त करने का आदेश भी दिया है। आखिर पूरा मामला क्या है और कोर्ट ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया?

Chandrashekhar Azad NBW

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 2, 2026

Chandrashekhar Azad NBW : उत्तर प्रदेश के नगीना लोकसभा क्षेत्र से सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट यानी NBW जारी किया है। यह कार्रवाई साहिबाबाद थाना क्षेत्र में दर्ज करीब आठ साल पुराने एक मामले में की गई है। कोर्ट ने वारंट जारी करने के साथ उनकी संपत्ति जब्त करने से जुड़ा आदेश भी दिया है।

सुनवाई में पेश नहीं होने का आरोप

मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि चंद्रशेखर आजाद लगातार अदालत की कार्यवाही से अनुपस्थित रहे हैं। शिकायतकर्ता के वकील ने कोर्ट के समक्ष यह भी कहा कि इससे पहले भी उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद वह सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। इसी आधार पर शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत से सख्त कार्रवाई की मांग की।

हथियारों को लेकर सवाल पूछने पर विवाद का आरोप

यह मामला वर्ष 2018 में साहिबाबाद में आयोजित एक शादी समारोह से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायत के मुताबिक, उस समारोह में चंद्रशेखर आजाद भी पहुंचे थे और उनके साथ कई समर्थक मौजूद थे। आरोप है कि कुछ समर्थकों के पास हथियार भी थे। इसी दौरान शादी समारोह में मौजूद धर्मेंद्र कुमार ने कथित तौर पर चंद्रशेखर आजाद से पूछा कि इतनी संख्या में हथियार क्यों लाए गए हैं।

चंद्रशेखर और समर्थकों पर मारपीट का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया कि सवाल पूछे जाने के बाद विवाद बढ़ गया। धर्मेंद्र कुमार का आरोप है कि चंद्रशेखर आजाद और उनके करीब 15 समर्थकों ने उनके साथ गाली-गलौच और मारपीट की। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसी घटना के संबंध में साहिबाबाद पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

किन धाराओं में दर्ज हुआ था मुकदमा?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह मुकदमा भारतीय दंड संहिता यानी IPC की धारा 323 और 305 के तहत दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई गाजियाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही है। अदालत में आरोपी की अनुपस्थिति और पहले जारी वारंट के बावजूद पेशी नहीं होने को लेकर शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत का ध्यान आकर्षित किया।

CRPC की धारा 82 और 83 का किया गया उल्लेख

शिकायतकर्ता के वकील ने अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी करने के साथ संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई की मांग की। सुनवाई के दौरान आपराधिक प्रक्रिया संहिता यानी CRPC की धारा 82 और 83 का उल्लेख किया गया। इन प्रावधानों के तहत फरार व्यक्ति की उद्घोषणा और कुछ परिस्थितियों में उसकी संपत्ति की कुर्की की प्रक्रिया का प्रावधान है।

सांसद की कोर्ट में पेशी को लेकर बढ़ा दबाव

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट ने चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया और संपत्ति कुर्क करने से जुड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और सांसद की अदालत में पेशी पर नजर रहेगी। हालांकि, मामले में लगाए गए मारपीट और धमकी जैसे आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आरोप साबित होना अदालत के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

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