UP News: चंद्रशेखर आजाद की बड़ी मांग, राज्यसभा में बढ़ें सीटें, ओबीसी को मिले आबादी के अनुसार आरक्षण

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संसद में आरक्षण और सीटों के विस्तार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिना 'कोटे में उप-कोटा' के दलित और पिछड़ी महिलाएं हाशिये पर रह जाएंगी। उन्होंने लोकसभा की तर्ज पर राज्यसभा सीटों को बढ़ाकर 383 करने और ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की पुरजोर वकालत की है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 17, 2026

UP News: भारतीय राजनीति में आरक्षण और संसदीय प्रतिनिधित्व को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है। नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने संसद में पिछड़ी जातियों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर एक मजबूत पक्ष रखा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि वर्तमान व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो आरक्षण का वास्तविक लाभ उन लोगों तक नहीं पहुँच पाएगा जो वास्तव में इसके हकदार हैं। उनके इस बयान ने विधायी संस्थानों में प्रतिनिधित्व और सामाजिक समानता के सवाल को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है।

‘कोटे के भीतर कोटा’ की अनिवार्यता पर जोर दिया

सांसद ने महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में ‘कोटे के भीतर कोटा’ की अनिवार्यता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिना उप-कोटा के आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं वर्गों तक सीमित रह जाएगा जो पहले से ही सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त हैं। आजाद के अनुसार, दलित, पिछड़े और मुस्लिम वर्गों की महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रावधानों की आवश्यकता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उप-कोटा लागू नहीं किया गया, तो हाशिये पर रहने वाली ये महिलाएं मुख्यधारा की राजनीति से बाहर ही रह जाएंगी। उनके अनुसार, सामाजिक न्याय का उद्देश्य केवल संख्या पूरी करना नहीं, बल्कि सबसे निचले पायदान पर खड़ी महिला को भी नेतृत्व का अवसर देना होना चाहिए।

राज्यसभा सीटों में वृद्धि और संसदीय उच्च सदन का विस्तार

चंद्रशेखर आजाद ने केवल लोकसभा ही नहीं, बल्कि राज्यसभा के ढांचे में भी बड़े बदलाव की वकालत की है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह लोकसभा की सीटों में वृद्धि प्रस्तावित है, उसी अनुपात में उच्च सदन यानी राज्यसभा की सदस्य संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। वर्तमान में राज्यसभा की सीटें लोकसभा का लगभग 45% हैं।
सांसद ने गणितीय आधार पर मांग रखी कि यदि लोकसभा की सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो 850 सीटों के 45% के अनुपात में राज्यसभा की सीटों को बढ़ाकर लगभग 383 कर देना चाहिए। यह कदम विधायी प्रक्रिया में राज्यों के बेहतर प्रतिनिधित्व और संतुलित चर्चा के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।

जनसंख्या के अनुपात में OBC आरक्षण और विधायी परिषदों में हिस्सेदारी

सांसद ने केवल संसद ही नहीं, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं और विधान परिषदों में भी आरक्षण के दायरे को बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाए, विशेषकर उन संस्थानों में जहाँ अभी तक यह व्यवस्था लागू नहीं है।

उन्होंने जोर दिया कि जिस तरह अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में सीटें आरक्षित हैं, ठीक उसी तर्ज पर पिछड़ी और ‘अति पिछड़ी’ जातियों के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

सामाजिक सशक्तिकरण के लिए विधायी सुधारों की अनिवार्यता

चंद्रशेखर आजाद ने अपने संबोधन के अंत में दोहराया कि भारत का लोकतंत्र तभी समावेशी कहलाएगा जब हर वर्ग की भागीदारी उसकी आबादी के हिसाब से तय होगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व का अधिकार केवल कुछ खास समूहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

पिछड़ी जातियों और अल्पसंख्यकों के हक की बात करते हुए उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य के परिसीमन और विधायी परिवर्तनों में इन सुझावों को प्राथमिकता दी जाए। उनके इन प्रस्तावों ने आगामी राजनीतिक चर्चाओं के लिए एक नया एजेंडा तैयार कर दिया है, जिससे आने वाले समय में आरक्षण और संसदीय सीटों के बंटवारे पर बड़ी बहस देखने को मिल सकती है।