Chandigarh Mayor Election: चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के बीच सभी अटकलों पर विराम लग गया है। दोनों दलों ने साफ कर दिया है कि वे इस चुनाव में अलग-अलग उम्मीदवार उतारेंगे। आम आदमी पार्टी के मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि कांग्रेस के साथ AAP का न तो कोई गठबंधन है और न ही भविष्य में इसकी कोई संभावना है।
अनुराग ढांडा का कांग्रेस और बीजेपी पर तीखा हमला
अनुराग ढांडा ने अपने बयान में कांग्रेस और बीजेपी दोनों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बीजेपी के साथ मिलकर देश को लूटने का काम किया है। ढांडा के अनुसार, आम आदमी पार्टी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो आम लोगों के हक और संघर्ष की सच्ची आवाज बनकर सामने आई है। उन्होंने दो टूक कहा कि देश को नुकसान पहुंचाने वाली इन दोनों पार्टियों से AAP का कोई संबंध नहीं हो सकता।
डिप्टी मेयर पद के लिए AAP का निर्दलीय दांव
आम आदमी पार्टी के पार्षद राम चंद्र यादव ने डिप्टी मेयर पद के लिए निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि पार्टी किसी भी तरह के गठबंधन के मूड में नहीं है और अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरना चाहती है। यह कदम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस के अंदरूनी कलह पर केजरीवाल और मान की चुटकी
पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी खींचतान पर AAP नेताओं ने तंज कसा है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कांग्रेस की हालत यह है कि सभी नेता आपस में लड़ रहे हैं, क्योंकि हर किसी को मुख्यमंत्री बनना है। वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं में सेवा भाव नहीं, बल्कि सत्ता का लालच है, इसलिए वे आपस में संघर्ष कर रहे हैं।
अलग-अलग उम्मीदवारों से बीजेपी की स्थिति मजबूत
राजनीतिक समीकरणों पर नजर डालें तो AAP और कांग्रेस के अलग-अलग उम्मीदवार उतारने से सबसे बड़ा फायदा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को होता दिख रहा है। चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं, जिनमें से 18 बीजेपी के हैं। आम आदमी पार्टी के पास 11 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद हैं। इस संख्या बल के आधार पर मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर—तीनों पदों पर बीजेपी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
क्यों टूटा गठबंधन, विशेषज्ञों की राय
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने दूरी बना ली है। दोनों दलों के बीच गठबंधन लगभग समाप्त हो चुका है। पहले भी कई राज्यों में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ चुकी हैं और अब पंजाब में भी यही रणनीति अपनाई जा रही है।विशेषज्ञों के अनुसार, अगर चंडीगढ़ मेयर चुनाव में कांग्रेस और AAP साथ रहते, तो भविष्य में अलग-अलग चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाता। इसी वजह से दोनों दलों ने यह जानते हुए भी कि उनकी हार तय है, अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारने का फैसला किया। यह कदम आगामी विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक जमीन तैयार करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।










