चैत्र पूर्णिमा 2026,1 अप्रैल को व्रत और 2 को स्नान-दान का शुभ संयोग, देखें पूजा के खास मुहूर्त

साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा कब है? हिंदू पंचांग के मुताबिक, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली यह पूर्णिमा तिथि व्रत, स्नान और दान के लिए काफी पुण्य मानी जाती है. इस साल यह तिथि दो दिन 1 और 2 अप्रैल तक है. इससे पहले सवाल यह उठता है कि, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए कौन-सा दिन सबसे अच्छा है. ऐसे में पंचांग देखना बेहद जरूरी है. आमतौर पर पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के समय पड़ने पर स्नान और दान-पुण्य किया जाता है, जबकि चंद्रोदय के समय पड़ने पर व्रत रखा जाता है. आइए इस विषय में

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Published On :

मार्च 28, 2026

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साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा कब है? हिंदू पंचांग के मुताबिक, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली यह पूर्णिमा तिथि व्रत, स्नान और दान के लिए काफी पुण्य मानी जाती है. इस साल यह तिथि दो दिन 1 और 2 अप्रैल तक है. इससे पहले सवाल यह उठता है कि, व्रत और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए कौन-सा दिन सबसे अच्छा है.

ऐसे में पंचांग देखना बेहद जरूरी है. आमतौर पर पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के समय पड़ने पर स्नान और दान-पुण्य किया जाता है, जबकि चंद्रोदय के समय पड़ने पर व्रत रखा जाता है. आइए इस विषय में विस्तार पर चर्चा करें.
चैत्र पूर्णिमा तिथि का समय

द्रिक पंचांग के मुताबिक, चैत्र पूर्णिमा बुधवार 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और गुरुवार 2 अप्रैल को सुबह 7.41 बजे तक चलेगी.
अनुष्ठानिक स्नान और दान

1  अप्रैल को पूर्णिमा तिथि सूर्योदय के बाद शुरू होती है, जबकि 2 अप्रैल को यह सूर्योदय के समय  मौजूद रहेगी.  इसलिए उदयतिथि के नियम के मुताबिक, 2 अप्रैल को स्नान करना दान करना और ज्यादा शुभ होता है.
उपवास की तिथि

1 अप्रैल को पूर्णिमा की तिथि सक्रिय रहने के कारण शाम को 6 बजकर 11 मिनट पर चंद्रोदय होगा. हालांकि 2 अप्रैल को शाम 7.07 मिनट पर चंद्रोदय होगा, जो प्रतिपदा में होगा. इसलिए 1 अप्रैल को ही चैत्र पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा.
शुभ मुहूर्त और उपासना का समय

2 अप्रैल को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4.38 बजे से 5.24 मिनट तक रहेगा, जो स्नान के लिए आदर्श समय है. अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजे से 12.50 मिनट तक रहेगा.1 अप्रैल को भगवान सत्यानारायण की पूजा करने के लिए सबसे अच्छा समय सुबह 6.11 बजे से लेकर 9.18 बजे के बीच है. शाम को सूर्यास्त के बाद (शाम 6.39 बजे), प्रदोष काल (गोधूलि बेला) के दौरान देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जिसके बाद उसी रात चंद्रमा को अर्घ्य किया जाता है.
शुभ योगों का संगम

1 अप्रैल को कई शुभ योग प्रभावी रहेंगे. रवि योग सुबह 6.11  बजे से शाम 4.17 बजे तक रहेगा. इसके बाद सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होगा और अगले दिन सुबह 6.10 बजे तक जारी रहेगा. इसके अलावा वृद्धि योग दोपहर 2.51 बजे तक सक्रिय रहेगा, जिसके बाद ध्रुव योग का प्रभाव शुरू हो जाएगा.

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