Chabahar Port 2026: नई दिल्ली में आयोजित ‘ईरानी राष्ट्रीय दिवस’ के भव्य समारोह के दौरान द्विपक्षीय संबंधों की एक नई चमक देखने को मिली। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने इस अवसर पर चाबहार बंदरगाह परियोजना को दोनों देशों के बीच मजबूत साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह परियोजना केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि साझा विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक साझा सपना है। राजदूत के अनुसार, भारत और ईरान के संबंध आधुनिक राजनीति से कहीं अधिक गहरे हैं; ये हजारों साल पुरानी सभ्यताओं और साझा इतिहास की नींव पर टिके हुए हैं।
ईरानी राष्ट्रीय दिवस: राजनयिक मंच पर बढ़ती घनिष्ठता
भारत में ईरानी दूतावास द्वारा आयोजित इस स्वागत समारोह में भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस मौके पर उन्होंने ईरान की सरकार और वहां की जनता को हार्दिक बधाई दी। विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर ईरान के साथ अपने संबंधों के प्रति स्थायी प्रतिबद्धता को दोहराया है। सचिव सिबी जॉर्ज की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक भू-राजनीतिक दबावों के बावजूद भारत, ईरान को अपना एक भरोसेमंद और रणनीतिक साझेदार मानता है।
चाबहार का रणनीतिक सफर: पाकिस्तान को दरकिनार कर मध्य एशिया तक पहुंच
चाबहार बंदरगाह के विकास का विचार भारत ने पहली बार 2003 में पेश किया था। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का प्राथमिक उद्देश्य पाकिस्तान के जमीनी मार्ग पर निर्भरता खत्म करना है। ‘अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे’ (INSTC) के माध्यम से भारत अपने सामान को सड़क और रेल कनेक्टिविटी के जरिए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक सीधे पहुंचाना चाहता है। हालांकि, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों ने समय-समय पर इस परियोजना की गति को प्रभावित किया है, लेकिन भारत ने अपने कूटनीतिक कौशल से इस प्रोजेक्ट को जीवित और सक्रिय रखा है।
आईपीजीएल (IPGL) और ईरान के बीच दीर्घकालिक ऐतिहासिक समझौता
चाबहार बंदरगाह के संचालन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड’ (IPGL) और ईरान के ‘पोर्ट एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन’ के बीच एक नया दीर्घकालिक समझौता किया गया है। यह समझौता साल 2016 में हुए पुराने अनुबंध का स्थान लेता है, जिसे अब तक केवल वार्षिक आधार पर ही बढ़ाया जाता था। इस नए और स्थायी करार से भारत को शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल के संचालन में स्थायित्व मिलेगा, जिससे भारतीय निवेशकों और व्यापारियों का भरोसा इस रूट पर और अधिक बढ़ेगा।
मानवीय सहायता और व्यापार का केंद्र बना चाबहार
हाल के वर्षों में चाबहार बंदरगाह ने अपनी उपयोगिता को साबित किया है। साल 2023 में भारत ने इसी मार्ग का उपयोग करते हुए अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं की मानवीय सहायता भेजी थी। इतना ही नहीं, 2021 में ईरान में टिड्डियों के हमले से निपटने के लिए भारत ने इसी बंदरगाह के जरिए पर्यावरण के अनुकूल कीटनाशक भी भेजे थे। आज चाबहार न केवल व्यापार का माध्यम है, बल्कि यह संकट के समय पड़ोसी देशों की मदद करने का एक सुरक्षित और भरोसेमंद गलियारा बन चुका है।









