CG News: कोंडागांव वन महोत्सव में 6 हजार पौधों का रोपण, केदार कश्यप का बड़ा संदेश

कोंडागांव के विश्रामपुरी में वनमंडल स्तरीय वन महोत्सव-2026 के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश गूंजा। वन मंत्री केदार कश्यप ने पौधरोपण कर लोगों से हरियाली अभियान से जुड़ने की अपील की। कार्यक्रम में हजारों पौधों के रोपण का दावा किया गया है। आखिर कश्यप ने जनता से कौन सा बड़ा संकल्प करवाया?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 4, 2026

CG News : छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत कोंडागांव जिले के केशकाल वन मंडल के अंतर्गत आने वाले बीरापारा में वन महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वन एवं जलवायु से जुड़े विषयों को लेकर लोगों को जागरूक किया गया और बड़े स्तर पर पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

वन मंत्री केदार कश्यप समेत कई जनप्रतिनिधि हुए शामिल

बीरापारा में आयोजित वन महोत्सव कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप मुख्य रूप से मौजूद रहे। उनके साथ केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, वन विभाग की डीएफओ दिव्या गौतम सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और ग्रामीणों की भी भागीदारी रही। इस दौरान सभी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।

15 से ज्यादा प्रजातियों के छह हजार पौधे लगाए गए

वन महोत्सव के दौरान बीरापारा क्षेत्र में बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया गया। यहां 15 से अधिक प्रजातियों के छह हजार से ज्यादा पौधे लगाए गए। पौधारोपण के जरिए क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ वन संरक्षण को मजबूत करने का संदेश दिया गया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने लोगों से लगाए गए पौधों की देखभाल करने और अधिक से अधिक संख्या में पौधे लगाने की अपील की।

बस्तर को लेकर वन मंत्री केदार कश्यप का बड़ा बयान

कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री केदार कश्यप ने बस्तर में नक्सलवाद खत्म होने के बाद जंगलों की कटाई और वन क्षेत्र उद्योगपतियों को सौंपे जाने से संबंधित कथित टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों की ओर से जनता के बीच इस तरह का भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्री ने ऐसी बातों को रोकने की जरूरत बताते हुए लोगों से अफवाहों पर भरोसा नहीं करने की अपील की।

बस्तर की संस्कृति और प्राकृतिक संपदा सुरक्षित रखने का भरोसा

केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर की अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपरा और समृद्ध प्राकृतिक संपदा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र की पहचान और पर्यावरण को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। वन मंत्री ने कहा कि सरकार बस्तर के जंगलों और वहां की प्राकृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर गंभीर है। उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि बस्तर के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।

जनता से भ्रमित नहीं होने की वन मंत्री ने अपील की

वन मंत्री ने बस्तर के लोगों से भी अपील की कि वे भ्रामक बातों और अफवाहों के प्रभाव में न आएं। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें फैलाने वालों की मानसिकता को समझने की जरूरत है। सरकार का उद्देश्य बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखते हुए क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाना है। उन्होंने लोगों से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया।

वन महोत्सव से हरियाली बढ़ाने का संदेश

केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि वन महोत्सव केवल पौधारोपण तक सीमित अभियान नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को जंगलों और पर्यावरण के महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में हरियाली का दायरा बढ़ाने, वन संरक्षण को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में काम कर रही है।

ग्रामीणों को विकास कार्यों की सौगात भी मिली

वन महोत्सव कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों के लिए विभिन्न विकास कार्यों और सुविधाओं से जुड़ी सौगातों की जानकारी भी दी गई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को भी प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को प्रकृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश दिया गया।

पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ आगे बढ़ा अभियान

बीरापारा में आयोजित वन महोत्सव कार्यक्रम ने पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया। छह हजार से अधिक पौधों का रोपण इस अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि रहा। वन विभाग और जनप्रतिनिधियों ने लोगों से पौधों की नियमित देखभाल करने तथा अपने आसपास हरियाली बढ़ाने की अपील की। कार्यक्रम के जरिए बस्तर की प्राकृतिक संपदा और जंगलों को संरक्षित रखने का संकल्प भी दोहराया गया।

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