CEC Controversy : मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। महुआ मोइत्रा का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सामने आई रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी।
महुआ मोइत्रा ने लगाए आपराधिक आचरण के आरोप
महुआ मोइत्रा ने कहा कि वह मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कथित आपराधिक आचरण को लेकर शिकायत करने पहुंची हैं। उनके मुताबिक चुनाव आयोग में तीन चुनाव आयुक्त होते हैं और निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं। उनका दावा है कि हालिया मीडिया रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर असहमति सामने आई है।

दो चुनाव आयुक्तों की असहमति का किया जिक्र
टीएमसी सांसद ने द इंडियन एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उनके अनुसार दो अन्य चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी, ने पिछले 10 महीनों में कई मौकों पर मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर असहमति जताई। महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि कुछ अवसरों पर एक ही दिन में कई बार आपत्ति दर्ज की गई।
चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम पर सवाल
महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग के आईटी सॉफ्टवेयर के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आईटी से जुड़े महत्वपूर्ण अधिकार डीजी आईटी सीमा खन्ना के पास केंद्रित किए गए और इससे स्थानीय स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका प्रभावित हुई। हालांकि, ये आरोप महुआ मोइत्रा द्वारा लगाए गए हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि इस शिकायत से नहीं होती।

ERO और BLO की भूमिका पर उठाया सवाल
टीएमसी सांसद ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र पर मतदाता सूची से संबंधित जिम्मेदारी स्थानीय अधिकारियों, निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों यानी ERO और बूथ लेवल अधिकारियों यानी BLO की होती है। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के जरिए इन स्थानीय अधिकारियों को दरकिनार किया गया और उन्हें सिस्टम तक अपेक्षित पहुंच नहीं मिली।
Form 6 को लेकर भी लगाए आरोप
महुआ मोइत्रा ने नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि Form 6 में SIR से जुड़ा एक अतिरिक्त सवाल शामिल किया गया। उनके मुताबिक इसमें आवेदक से पूछा गया कि क्या वह, उसके माता-पिता या दादा-दादी SIR से जुड़े रहे हैं।
नियमों में बदलाव का उठाया मुद्दा
महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि चुनाव आयुक्तों ने इस सवाल को लेकर आपत्ति जताई थी। उनके अनुसार आपत्ति यह थी कि Form 6 में इस तरह का बदलाव करने के लिए संबंधित नियमों में संशोधन आवश्यक है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियमों में बदलाव किए बिना ऐसा प्रावधान जोड़ा गया, तो इसका कानूनी आधार क्या था।

मतदाता सूची से नाम हटाने का दावा
महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसका असर भविष्य में नए मतदाताओं के पंजीकरण पर भी पड़ सकता है। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है तथा मतदाता सूची में बदलाव के आंकड़े प्रक्रिया और राज्य के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
शिकायत के बाद बढ़ी राजनीतिक बहस
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस शिकायत के बाद SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। महुआ मोइत्रा ने अपनी शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। अब इस मामले में पुलिस और संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या कार्रवाई या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर नजर रहेगी।










