CBI Director : केंद्र सरकार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के वर्तमान निदेशक प्रवीण सूद पर एक बार फिर भरोसा जताते हुए उनके कार्यकाल को एक वर्ष के लिए और बढ़ा दिया है। 1986 बैच के कर्नाटक कैडर के अनुभवी आईपीएस अधिकारी सूद का कार्यकाल 13 मई 2026 को समाप्त हो रहा था, जिसे अब अगले एक साल के लिए विस्तारित कर दिया गया है। गौरतलब है कि उन्होंने 25 मई 2023 को दो साल के लिए यह जिम्मेदारी संभाली थी। यह उनका दूसरा सेवा विस्तार है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार महत्वपूर्ण जांचों के बीच नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखना चाहती है।
तकनीक और प्रोफेशनल जांच पर जोर: कार्यकाल की उपलब्धियां
प्रवीण सूद के नेतृत्व में सीबीआई ने अपनी कार्यप्रणाली में व्यापक बदलाव किए हैं। उन्हें एक ‘टेक्नोलॉजी-ड्रिवन’ अधिकारी माना जाता है, जिन्होंने एजेंसी को अधिक प्रोफेशनल और आधुनिक बनाने पर जोर दिया। उनके कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार, साइबर अपराध, पेपर लीक और अंतरराज्यीय संगठित अपराधों के खिलाफ कई कड़े ऑपरेशन चलाए गए। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में चल रहे कई संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामलों की गहराई को देखते हुए सरकार ने उनके अनुभव को प्राथमिकता दी है। कर्नाटक के पूर्व डीजीपी रह चुके सूद की छवि एक सख्त और अनुशासनप्रिय अधिकारी की रही है।
राहुल गांधी का तीखा हमला: चयन प्रक्रिया को बताया ‘पक्षपातपूर्ण’
सीबीआई निदेशक के सेवा विस्तार और चयन प्रक्रिया को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक में राहुल गांधी ने हिस्सा लिया, लेकिन उन्होंने प्रक्रिया को ‘पक्षपातपूर्ण’ बताते हुए अपना असहमति नोट (Dissent Note) दर्ज कराया। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वह इस तरह की प्रक्रिया का हिस्सा बनकर अपने संवैधानिक कर्तव्य से समझौता नहीं कर सकते।

‘रबर स्टाम्प’ नहीं है विपक्ष का नेता: प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कड़ी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष की भूमिका महज एक ‘रबर स्टाम्प’ की नहीं होती। उनका दावा है कि सरकार चयन प्रक्रिया का मजाक बना रही है और ऐसा प्रतीत होता है कि किसी खास व्यक्ति का नाम पहले से ही तय कर लिया जाता है। प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत भी शामिल थे। राहुल ने अपने असहमति नोट में चयन के मानदंडों और पारदर्शिता की कमी पर चिंता व्यक्त की है।
आगामी चुनौतियां और सीबीआई की रणनीति
सेवा विस्तार मिलने के बाद अब प्रवीण सूद के सामने आने वाले एक साल में कई बड़ी चुनौतियां होंगी। सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, एजेंसी आने वाले समय में राष्ट्रीय महत्व के मामलों और बड़े आर्थिक घोटालों की जांच में अपनी आक्रामक रणनीति जारी रखेगी। राजनीतिक विवादों के बीच, प्रवीण सूद के लिए सबसे बड़ी चुनौती एजेंसी की निष्पक्षता को बनाए रखना और लंबित बड़े मामलों को तार्किक परिणति तक पहुंचाना होगा। सरकार के इस फैसले से जहां प्रशासनिक स्थिरता की बात कही जा रही है, वहीं विपक्ष इसे संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण की कोशिश करार दे रहा है।










